सोशल संवाद/डेस्क: रहमतों, बरकतों और इबादत का मुकद्दस महीना “रमजान” शुरू हो गया है. बुधवार शाम आसमान में चांद नजर आते ही फिजा में “मरहबा-मरहबा, माह-ए-रमजान मरहबा” की सदाएं गूंजने लगीं. इमारत-ए-शरिया और कोल्हान के काजी सऊद आलम ने चांद की तस्दीक (पुष्टि) कर दी है. देश में सबसे पहले बिहार और असम से चांद देखे जाने की खबरें मिलीं, जिसके बाद जमशेदपुर में भी इसका ऐलान हुआ. अब गुरुवार (19 फरवरी) को अकीदतमंद पहला रोजा रखेंगे.

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कुरान शरीफ की तिलावत शुरू
चांद की तस्दीक होते ही बुधवार की रात (ईशा की नमाज के बाद) शहर की तमाम मस्जिदों में रमजान की विशेष नमाज ‘तरावीह’ का दौर शुरू हो गया. हाफिज-ए-कुरान ने कुरान शरीफ की तिलावत शुरू की. एक-दूसरे को ‘रमजान मुबारक’ कहने का सिलसिला देर रात तक चलता रहा. गुरुवार की सुबह सेहरी के लिए मस्जिदों से ऐलान और सायरन की आवाज सुनाई देगी.
चांद के आधार पर तय होती है तारीख
इस्लामी कैलेंडर (हिजरी) में महीनों की गणना चांद के घटने-बढ़ने पर आधारित होती है. यही वजह है कि ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुकाबले रमजान की तारीख हर साल बदलती है. चांद रात के अगले दिन से रोजा रखने की परंपरा है. यह महीना आत्म-संयम, धैर्य और जरूरतमंदों की मदद (जकात) का संदेश देता है.










