सोशल संवाद /डेस्क : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब सिर्फ टेक्नोलॉजी की दुनिया तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिकों ने AI की मदद से 16 नए वायरस डिज़ाइन किए हैं, जिनका मकसद वायरस के व्यवहार को बेहतर ढंग से समझना और भविष्य की दवाओं व वैक्सीन के विकास में मदद करना है।
शोधकर्ताओं के अनुसार, इन AI-डिज़ाइन किए गए वायरस का उपयोग नियंत्रित वैज्ञानिक अनुसंधान के लिए किया गया है। इससे यह समझने में सहायता मिल सकती है कि वायरस कैसे बदलते हैं और उनसे बचाव के बेहतर तरीके कैसे विकसित किए जाएं।
हालांकि, विशेषज्ञों ने चेतावनी भी दी है कि ऐसी तकनीक का दुरुपयोग होने का खतरा मौजूद है। यदि यह गलत हाथों में पहुंच जाए, तो इसका इस्तेमाल जैविक हथियार (Biological Weapon) विकसित करने जैसे खतरनाक उद्देश्यों के लिए भी किया जा सकता है। इसलिए AI आधारित जैविक अनुसंधान पर कड़े सुरक्षा मानकों और निगरानी की आवश्यकता बताई जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि AI एक शक्तिशाली तकनीक है, जो चिकित्सा और विज्ञान में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। लेकिन इसके सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग को सुनिश्चित करना उतना ही जरूरी है, ताकि इसका लाभ मानवता को मिले और संभावित जोखिमों को कम किया जा सके।









