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झारखंड में 21 नक्सली ढेर, अब किसकी बारी; सुरक्षा बलों के निशाने और कौन ?

By Riya Kumari

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झारखंड में 21 नक्सली ढेर,
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सोशल संवाद/डेस्क : भाकपा माओवादियों के खिलाफ ऑपरेशन मेधाहातू बड़ी सफलता के बाद भी जारी है। पतिराम मांझी, अनमोल और अमित मुंडा जैसे 17 कुख्यात माओवादियों के मारे जाने के बाद सुरक्षाबलों के टारगेट पर अब पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा है। जानकारी के अनुसार, जराइकेला इलाके में कैंप कर रहे मिसिर बेसरा के दस्ते में दो तेलगू दंपति टेक विश्वनाथ उर्फ पुसुनूहरि नाराहरि और उसकी पत्नी नीलिमा प्राटेक्शन दस्ते के सदस्य के तौर पर काम कर रहे हैं। टेक विश्वनाथ भाकपा माओवादियों का सबसे बड़ा विस्फोटक विशेषज्ञ माना जाता है।

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जानकारी के मुताबिक वर्तमान में जहां मिसिर बेसरा का दस्ता कैंप कर रहा, उस इलाके की पूरी घेराबंदी आईईडी के जरिए टेक विश्वनाथ व नीलिमा ने ही की है। यही वजह है कि जब कभी भी सुरक्षाबलों ने उस इलाके में अभियान चलाया, जवानों को आईईडी के कारण नुकसान उठाना पड़ा। कई बार ग्रामीण भी मारे गए या घायल हुए। राज्य पुलिस के आला अधिकारियों के मुताबिक, अब राज्य में सिर्फ दो ही तेलगू माओवादी सक्रिय हैं,

जबकि पूर्व में यह संगठन में काफी प्रभावी भूमिका में होते थे। वहीं पश्चिम बंगाल का रहने वाला सीसी मेंबर असीम मंडल भी मिसिर बेसरा के दस्ते के साथ है। असीम को माओवादी संगठन का रणनीतिकार माना जाता है। जानकारी के मुताबिक, मिसिर बेसरा के दस्ते में सैक सदस्य अजय महतो, रीजनल कमेटी मेंबर रामप्रसाद उर्फ सचिन मार्डी, अश्विन, संतोष महतो, सालूका कायम जैसे कुख्यात माओवादी शामिल हैं।

सीमावर्ती इलाकों में ओडिशा पुलिस अलर्ट

ओडिशा-झारखंड के सीमावर्ती इलाकों में पहले मुठभेड़ होने पर आम तौर पर नक्सली दस्ते झारखंड की सीमा से ओडिशा के इलाकों में प्रवेश कर जाते थे। लेकिन, इस बार ओडिशा पुलिस भी अलर्ट है। ओडिशा पुलिस सीमावर्ती इलाकों में मोर्चा संभाली हुई है और अपने क्षेत्र में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है। इस कारण सारंडा में घिरे नक्सली जंगल छोड़ ओडिशा इलाके में नहीं भाग पा रहे हैं।

पहले की घेराबंदी, अब कर रहे सफाया

ओडिशा-झारखंड के सीमावर्ती इलाकों में पहले सारंडा, कोल्हान और पोड़ाहाट जंगल में सुरक्षाबलों द्वारा वर्ष 2011 में ऑपरेशन एनाकोडा चलाकर दर्जनों जगहों पर कैंप बनाये गये थे। वर्ष 2024 से पहले सारंडा, कोल्हान और पोड़ाहाट जंगल समेत ओडिशा के इलाकों में सुरक्षाबलों के 65 कैंप थे। इसके बाद गत दो वर्षों में सुरक्षाबलों ने सारंडा और कोल्हान जंगल समेत ओडिशा के इलाकों में 25 और नये कैंप स्थापित किये हैं।

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