सोशल संवाद/डेस्क: भारत में आधार कार्ड अब सिर्फ पहचान का दस्तावेज नहीं रहा, बल्कि सरकारी योजनाओं, बैंकिंग और डिजिटल सेवाओं तक पहुंच का अहम जरिया बन चुका है। ऐसे में इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए 2.5 करोड़ से अधिक आधार कार्ड डीएक्टिवेट कर दिए हैं।
यह भी पढ़ें: शराब दुकान के रिन्यूअल की नई शर्तें 7 फरवरी तक देनी होगी लाइसेंस फीस
सरकार का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य आधार डेटाबेस को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और अपडेटेड बनाना है। केंद्रीय आईटी मंत्री जितिन प्रसाद के अनुसार देश में करीब 134 करोड़ आधार धारक हैं और समय-समय पर डेटा की सफाई जरूरी होती है, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी या फर्जीवाड़े को रोका जा सके।
बताया गया है कि जिन आधार कार्डों को बंद किया गया है, उनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की थी जिनका निधन हो चुका है। ऐसे मामलों में जालसाज मृत व्यक्तियों की पहचान का इस्तेमाल कर सरकारी योजनाओं और सब्सिडी का गलत लाभ उठा लेते थे। इस कार्रवाई से सरकारी धन के दुरुपयोग पर रोक लगाने में मदद मिलेगी।
इस फैसले का सीधा फायदा आम नागरिकों को भी मिलेगा। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ सही लाभार्थियों तक पहुंचेगा, बैंकिंग और डिजिटल लेनदेन में धोखाधड़ी की आशंका कम होगी और आधार आधारित सेवाओं पर भरोसा और मजबूत होगा। सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे समय-समय पर अपने आधार की जानकारी अपडेट करते रहें। यदि आधार कई साल पुराना है, तो मोबाइल नंबर और पते का सत्यापन कराना सुरक्षा के लिहाज से जरूरी माना जा रहा है।










