सोशल संवाद/डेस्क : गोवा के चर्चित नाइटक्लब ‘बर्च बाय रोमियो लेन’ में 7 दिसंबर की आधी रात को लगी भीषण आग ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। इस दर्दनाक हादसे में 25 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए। इस घटना के बाद क्लब के मालिक सौरभ लुथरा और गौरव लुथरा जांच एजेंसियों के रडार पर आ गए। अब दोनों भाइयों को थाईलैंड से भारत डिपोर्ट कर दिया गया है, जहां उन्हें इस मामले में कानूनी प्रक्रिया का सामना करना होगा।

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हादसा 7 दिसंबर की रात करीब 12 बजे के आसपास हुआ, जब नाइटक्लब में भारी भीड़ मौजूद थी। नए साल से पहले पार्टी के माहौल में लोग डांस फ्लोर पर झूम रहे थे। इसी दौरान क्लब में मंच पर परफॉर्मेंस चल रही थी और कथित तौर पर इलेक्ट्रिक पटाखों का इस्तेमाल किया जा रहा था। कुछ ही पलों में आग ने छत को अपनी चपेट में ले लिया। देखते ही देखते पूरा क्लब धुएं और लपटों से भर गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग लगने के शुरुआती क्षणों में न तो कोई अलार्म बजा और न ही लोगों को बाहर निकलने की कोई स्पष्ट सूचना दी गई। जब तक लोगों को हालात की गंभीरता का अंदाजा हुआ, तब तक जहरीला धुआं पूरे डांस फ्लोर में फैल चुका था। कई लोग जान बचाने के लिए बेसमेंट और किचन की ओर भागे, लेकिन वहां फंस गए। बाद में अधिकारियों ने बताया कि ज्यादातर मौतें आग से नहीं, बल्कि धुएं में दम घुटने की वजह से हुईं।
हादसे के बाद सामने आया कि नाइटक्लब का ढांचा बेहद संकरा था। क्लब तक पहुंचने के रास्ते भी इतने तंग थे कि दमकल की गाड़ियों को मौके तक पहुंचने में काफी परेशानी हुई। फायर ब्रिगेड को करीब 400 मीटर दूर वाहन खड़े कर पैदल ही रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना पड़ा, जिससे राहत कार्य में देरी हुई।
इस बीच, हादसे के कुछ ही घंटों बाद लुथरा ब्रदर्स के देश छोड़ने की खबर सामने आई। पुलिस के अनुसार, आग लगने के कुछ समय बाद ही दोनों भाइयों ने ऑनलाइन टिकट बुक किए और सुबह की फ्लाइट से थाईलैंड के फुकेत के लिए रवाना हो गए। उस वक्त वे दिल्ली में एक शादी समारोह में मौजूद थे। हालांकि बाद में उनके वकील ने अदालत में दावा किया कि वे व्यवसायिक कारणों से विदेश गए थे।
देश से बाहर जाने के बाद दोनों भाइयों की लोकेशन सामने आई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी तलाश तेज हो गई। इंटरपोल ने इस मामले में ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया, जिसके बाद थाई पुलिस ने फुकेत में उन्हें ट्रैक कर हिरासत में ले लिया। इसी दौरान भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए दोनों के पासपोर्ट सस्पेंड कर दिए, ताकि वे किसी अन्य देश में भाग न सकें।
पासपोर्ट निलंबित होने के बाद मामला प्रत्यर्पण से हटकर डिपोर्टेशन की दिशा में बढ़ गया। हालांकि इसमें भी कुछ तकनीकी और कूटनीतिक अड़चनें आईं। पासपोर्ट सस्पेंड होने के कारण दोनों भाइयों को बिना वैध यात्रा दस्तावेजों के भारत नहीं भेजा जा सकता था। ऐसे में भारतीय दूतावास को उन्हें इमरजेंसी ट्रैवल सर्टिफिकेट जारी करना पड़ा। सप्ताहांत और औपचारिक प्रक्रियाओं के कारण इसमें कुछ दिन की देरी हुई, लेकिन आखिरकार आवश्यक दस्तावेज जारी किए गए।
इसी दौरान भारत में लुथरा ब्रदर्स ने दिल्ली की अदालत में अग्रिम जमानत और गिरफ्तारी से संरक्षण की मांग की। उनके वकील ने दलील दी कि हादसे के समय दोनों मौके पर मौजूद नहीं थे और वे रोजमर्रा के संचालन में सीधे तौर पर शामिल नहीं रहते। उन्होंने इसे लापरवाही का मामला बताते हुए कहा कि इसमें किसी तरह की आपराधिक मंशा नहीं थी। हालांकि अदालत ने उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया और याचिका खारिज कर दी।
अंततः थाई इमिग्रेशन अधिकारियों की निगरानी में दोनों भाइयों को भारत लाया गया। उनके भारत पहुंचते ही अब पुलिस और जांच एजेंसियां उनसे पूछताछ करेंगी। जांच का फोकस इस बात पर रहेगा कि क्या क्लब में सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था, क्या फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी हुई और क्या प्रबंधन की लापरवाही इस बड़े हादसे की वजह बनी।
यह मामला सिर्फ एक हादसे तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में नाइटलाइफ, इवेंट मैनेजमेंट और सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। गोवा जैसे पर्यटन स्थल पर हुए इस अग्निकांड ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या मनोरंजन के नाम पर सुरक्षा से समझौता किया जा रहा है।
अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या सामने आता है और पीड़ित परिवारों को न्याय कब और कैसे मिलेगा। 25 लोगों की मौत ने न सिर्फ कई घरों को उजाड़ दिया, बल्कि प्रशासन और सिस्टम की जिम्मेदारियों पर भी बड़ा सवाल छोड़ दिया है।










