सोशल संवाद/डेस्क : भारत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। ताजा वैश्विक रिपोर्ट के अनुसार, भारत अब दुनिया के तीन सबसे प्रतिस्पर्धी AI देशों में शामिल हो गया है। यह उपलब्धि न केवल भारत की तकनीकी क्षमता को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि देश तेजी से वैश्विक टेक्नोलॉजी लीडर बनने की ओर बढ़ रहा है। अमेरिका और चीन के बाद भारत का तीसरे स्थान पर पहुंचना अपने आप में बड़ी बात मानी जा रही है।

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स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के ग्लोबल AI वाइब्रेंसी टूल की रिपोर्ट के मुताबिक, AI प्रतिस्पर्धा में अमेरिका पहले स्थान पर बना हुआ है, जबकि चीन दूसरे नंबर पर है। भारत ने इस रेस में तीसरा स्थान हासिल कर सिंगापुर, जापान, जर्मनी, फ्रांस, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम जैसे तकनीकी रूप से मजबूत देशों को पीछे छोड़ दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत के डिजिटल इकोसिस्टम की मजबूती और तेजी से बढ़ते इनोवेशन का नतीजा है।

यह रिपोर्ट किसी भी देश की AI क्षमता को एक-दो मानकों पर नहीं, बल्कि कई अहम पहलुओं पर परखती है। इसमें रिसर्च और डेवलपमेंट, AI से जुड़े स्टार्टअप्स, कुशल तकनीकी प्रतिभा, निवेश का स्तर, तकनीकी ढांचा, सरकारी नीतियां और समाज में AI को लेकर जागरूकता जैसे बिंदुओं को शामिल किया जाता है। इन सभी मानकों पर भारत का प्रदर्शन लगातार बेहतर हुआ है, जिसके चलते देश ने यह ऊंचा स्थान हासिल किया।
भारत की इस सफलता के पीछे सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी और टेक्नोलॉजी में रुचि रखने वाला टैलेंट माना जा रहा है। देश में हर साल बड़ी संख्या में इंजीनियर और आईटी प्रोफेशनल्स तैयार हो रहे हैं, जो AI, मशीन लर्निंग और डेटा साइंस जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे हैं। इसके साथ ही भारतीय स्टार्टअप्स भी AI आधारित समाधान विकसित कर वैश्विक बाजार में अपनी पहचान बना रहे हैं।

सरकार की भूमिका भी इस उपलब्धि में अहम रही है। डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और AI से जुड़ी राष्ट्रीय नीतियों ने इस सेक्टर को मजबूत आधार दिया है। स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, ट्रैफिक मैनेजमेंट और सरकारी सेवाओं में AI के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे न सिर्फ तकनीक का विकास हो रहा है, बल्कि आम लोगों के जीवन में भी बदलाव नजर आ रहा है।
AI में भारत की बढ़ती ताकत का असर अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने की उम्मीद है। विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले वर्षों में AI आधारित उद्योगों से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। ऑटोमेशन, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और डेटा एनालिटिक्स जैसे क्षेत्रों में भारत वैश्विक कंपनियों के लिए बड़ा केंद्र बन सकता है। इससे निवेश बढ़ेगा और देश की आर्थिक स्थिति को भी मजबूती मिलेगी।

हालांकि, चुनौतियां भी कम नहीं हैं। डेटा सुरक्षा, गोपनीयता, स्किल गैप और AI के नैतिक उपयोग जैसे मुद्दों पर भारत को अभी और काम करने की जरूरत है। इसके बावजूद, जिस रफ्तार से देश आगे बढ़ रहा है, उससे यह साफ है कि भारत इन चुनौतियों से निपटने में सक्षम है।
कुल मिलाकर, AI के क्षेत्र में भारत का टॉप–3 देशों में शामिल होना देश के लिए गर्व की बात है। यह उपलब्धि बताती है कि भारत अब केवल टेक्नोलॉजी अपनाने वाला देश नहीं रहा, बल्कि नई तकनीकों को विकसित करने और दिशा देने की क्षमता भी रखता है। आने वाले समय में भारत का AI सफर और भी मजबूत होने की उम्मीद है, जिससे देश वैश्विक तकनीकी मंच पर एक बड़ी भूमिका निभा सकता है।










