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दिल्ली में भाजपा की चार इंजन की सरकार है, फिर भी तीन इंजनों से एमसीडी को धेला भर भी मदद नहीं मिली – अंकुश नारंग

By Riya Kumari

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दिल्ली में भाजपा
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 सोशल संवाद / नई दिल्ली : सिविक सेंटर स्थित एमसीडी मुख्यालय में मंगलवार को स्थायी समिति की बैठक में आम आदमी पार्टी के समिति सदस्यों ने वर्ष 2026–27 के अनुमानित बजट पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान नेता प्रतिपक्ष अंकुश नारंग ने कहा कि यह बजट जनता की प्राथमिकताओं से कोसों दूर नजर आता है।

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बजट महज एक कागजी दस्तावेज के अलावा कुछ नहीं है।  उन्होंने कहा कि हमने दिल्ली की बदहाल सफ़ाई व्यवस्था, बढ़ते प्रदूषण, एमसीडी स्कूलों की दुर्दशा और चरमराती स्वास्थ्य सेवाओं जैसे जनहित से जुड़े अहम मुद्दों को मजबूती से उठाया और भाजपा शासित एमसीडी की नाकामियों को उजागर किया। बजट केवल आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि दिल्लीवासियों को बेहतर, स्वच्छ और स्वस्थ जीवन देने का माध्यम होना चाहिए। इस बैठक में प्रवीन राजपूत, मोहिनी जीनवाल, राफिया माहिर, सुश्री रविंदर कौर, मोहम्मद आमिल मालिक एवं दौलत पवार उपस्थिति रहे।

मंगलवार को अंकुश नारंग ने बताया कि आज स्टैंडिंग कमेटी के अंदर एमसीडी के बजट पर चर्चा हुई। उन्होंने हैरानी जताई कि भाजपा की चार इंजन की सरकार है, लेकिन चारों इंजन मिलकर भी एमसीडी की मदद नहीं कर पा रहे हैं ताकि उसे कहीं से बजट मिले और काम सुचारू रूप से चले।

अंकुश नारंग ने कहा कि भाजपा कहती थी कि अगर केंद्र से लेकर निगम तक उनकी सरकार होगी, तो सारे काम आसान हो जाएंगे। लेकिन आज एमसीडी कमिश्नर ने जो बजट सामने रखा और जिस पर विचार-विमर्श हुआ, उसमें कहीं भी ऐसा नहीं दिखाई दे रहा कि एमसीडी के अंदर कोई सुधार आएगा। यह जनता का बजट नहीं, बल्कि महज एक कागजी बजट दिखाई दे रहा है।

अंकुश नारंग ने कहा कि इस कागजी बजट में जन प्राथमिकताएं दूर-दूर तक नजर नहीं आ रही हैं। स्वच्छता, साफ-सफाई, पार्कों का रखरखाव, नए पेड़ लगाना और आवारा पशुओं व पक्षियों की समस्याओं का समाधान जैसी बुनियादी चीजों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी, लेकिन बजट में ये नदारद हैं। न तो पार्षदों का बजट बढ़ाया गया है और न ही जनता की प्राथमिकताओं के लिए बजट में बढ़ोतरी की गई है।

अंकुश नारंग ने कहा कि एमसीडी की दूसरी बड़ी जिम्मेदारी उसके कर्मचारी हैं, लेकिन उनके लिए बजट में कोई ठोस प्रावधान नहीं है। सफाई कर्मचारियों को 5,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की बात तो की गई है, लेकिन उनकी कैशलेस मेडिकल स्कीम, उन्हें पक्का करने, पोस्ट रिटायरमेंट बेनिफिट्स और वेतन वृद्धि को लेकर कोई चर्चा नहीं है। इसी तरह, एमटीएस कर्मचारियों को पक्का करने और समान वेतन देने की बात भी कहीं नहीं है।

अंकुश नारंग ने कहा कि पिछले एक साल में भाजपा ने देखा कि उनके कार्यकाल में कर्मचारी हड़ताल पर रहे, फिर भी उनके लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया। भाजपा ने सिर्फ रस्म अदायगी के लिए एक कागजी बजट पेश किया है, जिसमें जनता का बजट गायब है। सुझाव तो भाजपा की 15 साल की पिछली सरकार में भी आते रहे, लेकिन उन पर कभी अमल नहीं हुआ। बजट की किताबों में लिखी बातें कभी पूरी नहीं होतीं। भाजपा की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का अंतर है।

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