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गुरु तेग बहादुर जी की शहादत मानवता और आस्था की आज़ादी के लिए थी: मनजिंदर सिंह सिरसा

By Riya Kumari

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सोशल संवाद / नई दिल्ली : दिल्ली विधानसभा में गुरु तेग बहादुर के 350वें शहीदी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान माननीय पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने नौवें सिख गुरु हिंद दी चादर गुरु तेग बहादुर की महान शहादत को स्मरण करते हुए इसे मानवता, धार्मिक स्वतंत्रता और सत्य के लिए दिया गया सर्वोच्च बलिदान बताया।

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सिरसा ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि गुरु तेग बहादुर की शहादत दिल्ली की धरती पर हुई और यह केवल सिख समाज ही नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र और विश्व मानवता के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने विस्तार से बताया कि किस प्रकार गुरु तेग बहादुर जी ने कश्मीरी पंडितों और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए औरंगज़ेब के अत्याचारों के सामने झुकने से इनकार करते हुए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया।

उन्होंने कहा:

“गुरु तेग बहादुर ने मानवता के लिए, लोगों के धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। यह शहादत केवल सिखों की नहीं, पूरे देश की विरासत है।” माननीय मंत्री ने गुरु जी के साथ शहीद हुए भाई मती दास, भाई सती दास और भाई दयाला जी की अमानवीय यातनाओं तथा गुरु गोविंद सिंह जी के चारों साहिबज़ादों, विशेषकर बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह की अल्पायु में दी गई शहादत को भी स्मरण किया।

इस दौरान सदन में हुई एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना का उल्लेख करते हुए सिरसा ने कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर की शहादत पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष द्वारा गुरु साहब के नाम के साथ एक ही वाक्य में असंवेदनशील और आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया, जो किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

सिरसा ने स्पष्ट शब्दों में कहा:

“जब गुरु तेग बहादुर की शहादत की बात हो रही हो, उस समय किसी भी प्रकार का अपशब्द, चाहे किसी भी भाव में कहा गया हो, पाप के समान है। गुरु साहब के नाम के साथ ऐसा शब्द बोलना असम्मानजनक है और इसके लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जानी चाहिए।”

उन्होंने कहा कि प्रदूषण जैसे गंभीर विषय पर चर्चा के लिए सरकार पहले ही अलग से पूरा दिन निर्धारित कर चुकी है, लेकिन शहादत जैसे पवित्र विषय को भटकाने का प्रयास निंदनीय है। माननीय मंत्री ने इस विषय पर सरकार द्वारा निंदा प्रस्ताव लाने का भी समर्थन किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका को रेखांकित करते हुए सिरसा ने कहा कि उनके नेतृत्व में देश ने इतिहास को सही परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत करने का कार्य किया। साहिबज़ादों को पाठ्यक्रम में शामिल करना, 400वां प्रकाश पर्व लाल किले से मनाना और वीर बाल दिवस को राष्ट्रीय पहचान देना ऐतिहासिक कदम हैं।

माननीय मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी और साहिबज़ादों के इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुँचाने के लिए इस बार अभूतपूर्व स्तर पर शैक्षणिक और जनभागीदारी कार्यक्रम आयोजित किए गए। उन्होंने बताया कि वीर बाल दिवस के अवसर पर देशभर के लगभग 15 लाख स्कूलों में 25 करोड़ से अधिक बच्चों ने गुरु तेग बहादुर जी के पोते बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह के बलिदान का इतिहास जाना। इसके साथ ही 1100 से अधिक विश्वविद्यालयों में ढाई करोड़ छात्रों ने इन महान शहादतों पर आधारित कार्यक्रमों और गतिविधियों में भाग लिया। मंत्री ने कहा कि लाखों छात्रों ने प्रतियोगिताओं के माध्यम से लिखकर, पढ़कर और समझकर इस इतिहास को आत्मसात किया।

उन्होंने आगे कहा कि दिल्ली सहित देशभर के स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों में लाखों पुस्तकों का वितरण किया गया, जिनमें गुरु तेग बहादुर से लेकर गुरु गोविंद सिंह और साहिबज़ादों तक का संपूर्ण इतिहास सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया। मंत्री ने कहा कि “हमने इतिहास को बच्चों के हाथ में किताब के रूप में दिया, ताकि आने वाली पीढ़ी यह जाने कि यह देश किन बलिदानों पर खड़ा है।” उन्होंने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली में आयोजित समागम, विशेष संग्रहालय, अंतरराष्ट्रीय श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्थाओं और शैक्षणिक विभाग द्वारा किए गए प्रयासों को भी सराहनीय बताया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योगदान को रेखांकित करते हुए सिरसा ने कहा कि वर्षों तक जिन अत्याचारियों के नाम सड़कों, शहरों और पाठ्यपुस्तकों में पढ़ाए जाते रहे, प्रधानमंत्री मोदी ने उस मानसिकता को बदलने का साहसिक निर्णय लिया। “माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने औरंगाबाद जैसे नाम बदले, दिल्ली में औरंगज़ेब रोड का नाम बदला और यह तय किया कि यह देश अत्याचारियों की पहचान से नहीं, बल्कि गुरु तेग बहादुर साहब जैसे महापुरुषों के चरणों में नतमस्तक होकर अपनी पहचान पाएगा।” उन्होंने कहा कि इतिहास को सही संदर्भ में प्रस्तुत करना केवल नाम बदलना नहीं, बल्कि देश की आत्मा और पहचान को पुनः स्थापित करना है, और प्रधानमंत्री मोदी ने यह कार्य पूरे देश के लिए किया है।

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