सोशल संवाद/डेस्क: Jharkhand में अब कोचिंग संस्थानों की मनमानी पर सख्त लगाम लगने वाली है। झारखंड विधानसभा से पारित कोचिंग सेंटर नियंत्रण एवं विनियमन विधेयक 2025 को राज्यपाल की मंजूरी मिल चुकी है। गजट में प्रकाशन के बाद यह कानून पूरे राज्य में लागू हो जाएगा। इस कानून का मकसद कोचिंग सेक्टर को अनुशासित करना और छात्रों के हितों की सुरक्षा करना है।

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नए नियमों के तहत 50 से अधिक छात्रों वाले कोचिंग संस्थानों को अपनी फीस संरचना, फीस वसूली की प्रक्रिया और लेखा-जोखा पूरी तरह पारदर्शी रखना होगा। संस्थानों को पिछले तीन साल के खातों का विवरण चार्टर्ड अकाउंटेंट के माध्यम से देना अनिवार्य होगा। इससे आर्थिक गड़बड़ियों पर रोक लगेगी।
हर कोचिंग सेंटर को स्थापना के छह महीने के भीतर अलग-अलग रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इसके साथ ही पांच साल के लिए पांच लाख रुपये की बैंक गारंटी जमा करनी होगी। रजिस्ट्रेशन की वैधता पांच साल की होगी, जिसके बाद नवीनीकरण जरूरी होगा। इससे फर्जी और अवैध कोचिंग सेंटरों पर रोक लगेगी।
कानून के तहत निगरानी के लिए जिला और राज्य स्तर पर रेगुलेटरी कमेटियों का गठन किया जाएगा। जिला स्तर पर उपायुक्त की अध्यक्षता में कमेटी काम करेगी, जबकि राज्य स्तर पर न्यायिक अधिकारी की अध्यक्षता में प्राधिकरण बनेगा। छात्रों और अभिभावकों को सही जानकारी मिले, इसके लिए हर कोचिंग सेंटर को अपनी वेबसाइट पर कोर्स, फीस, शिक्षक और सुविधाओं की जानकारी नियमित रूप से अपडेट करनी होगी।
छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर भी खास फोकस किया गया है। 16 साल से कम उम्र के छात्रों के लिए अभिभावकों की अनुमति जरूरी होगी। बड़े कोचिंग सेंटरों में काउंसलर की नियुक्ति भी अनिवार्य होगी। नियमों का उल्लंघन करने पर भारी जुर्माना और रजिस्ट्रेशन रद्द करने तक का प्रावधान किया गया है। यह कानून राज्य में कोचिंग व्यवस्था को सुधारने की दिशा में एक अहम और ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।










