---Advertisement---

नगर निगम चुनाव: मेयर, पार्षद और अध्यक्ष में क्या अंतर? जानिए किसके पास कितनी ताकत

By Aditi Pandey

Published :

Follow
difference between a mayor councillor and chairman नगर

Join WhatsApp

Join Now

सोशल संवाद/डेस्क: जमशेदपुर में नगर निगम चुनाव की घोषणा के साथ ही राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। शहर में पोस्टर, बैनर और जनसंपर्क के बीच आम लोगों के मन में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि नगर निगम में मेयर, पार्षद और अध्यक्ष की भूमिका क्या होती है और इन तीनों में असली ताकत किसके पास होती है?

यह भी पढ़ें: एमएस धोनी बनेंगे झारखंड टूरिज्म के ब्रांड एंबेसडर, राज्य को मिलेगी नई पहचान

दरअसल, नगर निगम शहर की सबसे बड़ी स्थानीय सरकार होती है, जो सफाई, सड़क, पानी, स्ट्रीट लाइट, टैक्स और शहर के विकास से जुड़े फैसले लेती है। इन सभी कामों को सही तरीके से चलाने के लिए अलग-अलग पद बनाए गए हैं।

मेयर: शहर का पहला नागरिक

मेयर नगर निगम का सर्वोच्च पद होता है और उसे शहर का पहला नागरिक कहा जाता है। मेयर पूरे शहर का प्रतिनिधित्व करता है और नगर निगम की सामान्य बैठकों की अध्यक्षता करता है। शहर के विकास, बजट चर्चा, बड़ी योजनाओं और नीतिगत फैसलों में मेयर की अहम भूमिका होती है। हालांकि प्रशासनिक कामकाज में नगर आयुक्त की भी बड़ी भूमिका होती है, लेकिन जनता की आवाज मेयर के माध्यम से सरकार तक पहुंचती है।

पार्षद: जनता की सीधी आवाज

  • पार्षद वार्ड स्तर पर चुना गया जनप्रतिनिधि होता है। नगर निगम क्षेत्र को कई वार्डों में बांटा जाता है और हर वार्ड से एक पार्षद चुना जाता है।
  • पार्षद अपने वार्ड की समस्याएं जैसे सड़क, नाली, पानी, सफाई, अतिक्रमण और स्ट्रीट लाइट से जुड़ी शिकायतें नगर निगम में उठाता है।
  • पार्षद नगर निगम की बैठकों में हिस्सा लेकर प्रस्तावों पर चर्चा और वोटिंग करता है। आम जनता के लिए पार्षद सबसे नजदीकी प्रतिनिधि होता है।

अध्यक्ष / उपाध्यक्ष: निगम की व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी

नगर निगम अध्यक्ष या उपाध्यक्ष की भूमिका मेयर के साथ मिलकर निगम के कामकाज को सुचारु रूप से चलाने की होती है। बैठकों का संचालन, प्रस्तावों को क्रमबद्ध तरीके से आगे बढ़ाना और प्रशासन व निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच संतुलन बनाए रखना अध्यक्ष की जिम्मेदारी होती है।

किसके पास कितनी ताकत?

मेयर नीति और नेतृत्व का चेहरा होता है, पार्षद जमीनी समस्याओं की आवाज उठाता है, और अध्यक्ष निगम की कार्यप्रणाली को संतुलित करता है। तीनों मिलकर नगर निगम को चलाते हैं, लेकिन असली ताकत जनता के वोट में होती है, जो इन प्रतिनिधियों को चुनती है।

नगर निगम चुनाव में सही जानकारी के साथ वोट डालना बेहद जरूरी है, क्योंकि यही प्रतिनिधि आने वाले वर्षों में शहर की दिशा और दशा तय करेंगे।

YouTube Join Now
Facebook Join Now
Social Samvad MagazineJoin Now
---Advertisement---