सोशल संवाद/रांची: झारखंड सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत बनाने के लिए बड़ा कदम उठाते हुए 11 आईएएस अधिकारियों का तबादला और नई पदस्थापना की है। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, कई महत्वपूर्ण विभागों में नए सचिव नियुक्त किए गए हैं, जबकि कुछ वरिष्ठ अधिकारियों को अतिरिक्त जिम्मेदारियां देकर प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाने की कोशिश की गई है। सरकार का मानना है कि इस फेरबदल से विकास योजनाओं की निगरानी बेहतर होगी और शासन व्यवस्था अधिक प्रभावी बनेगी।

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नए आदेश के तहत राजीव रंजन को परिवहन विभाग का सचिव बनाया गया है। वहीं आबू इमरान को पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है। राज्य के बुनियादी ढांचे और जनसेवा से जुड़े इन विभागों में नए नेतृत्व से कार्यों में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। इसके अलावा संदीप सिंह को राज्य का नया श्रमायुक्त बनाया गया है, जिससे श्रमिकों से जुड़े मामलों और उद्योग क्षेत्र में बेहतर समन्वय की संभावना है।
प्रशासनिक बदलाव के तहत घोलप रमेश गोरख को आयुक्त, नागरिक सुरक्षा के पद पर तैनात किया गया है। वहीं शशि रंजन को पेयजल एवं स्वच्छता विभाग में अपर सचिव बनाया गया है। इन नियुक्तियों को प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि इन अधिकारियों के अनुभव से विभागीय कार्यों में गति आएगी और जनता को बेहतर सेवाएं मिलेंगी।
प्रमंडलीय स्तर पर भी बदलाव किए गए हैं। मनोज कुमार को प्रमंडलीय आयुक्त के साथ उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। संजय कुमार को संथाल परगना का प्रभारी प्रमंडलीय आयुक्त बनाया गया है। इसके अलावा कुमुद सहाय को पलामू और रविरंजन कुमार विक्रम को कोल्हान प्रमंडल का प्रभारी आयुक्त नियुक्त किया गया है। इन नियुक्तियों का उद्देश्य क्षेत्रीय प्रशासन को मजबूत बनाना और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन को तेज करना है।
सरकार ने अनुभवी अधिकारियों पर भरोसा जताते हुए अतिरिक्त जिम्मेदारियां भी सौंपी हैं। मुकेश कुमार को उनके वर्तमान कार्यों के साथ पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। वहीं उमाशंकर सिंह को महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन विभागों का सीधा संबंध सामाजिक विकास और युवाओं के भविष्य से जुड़ा है, इसलिए अनुभवी नेतृत्व पर जोर दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रशासनिक फेरबदल समय-समय पर जरूरी होता है, ताकि नई ऊर्जा और बेहतर प्रबंधन के साथ सरकारी योजनाओं को आगे बढ़ाया जा सके। राज्य सरकार भी इसी दिशा में काम करते हुए प्रशासनिक कसावट लाने और विकास कार्यों को गति देने पर फोकस कर रही है। आने वाले दिनों में इन नियुक्तियों का असर प्रशासनिक कार्यशैली और जनसेवाओं की गुणवत्ता पर साफ देखने को मिल सकता है।










