सोशल संवाद/डेस्क : भारत में Passport किसी भी उम्र में बनवाया जा सकता है, यहाँ तक कि नवजात शिशुओं (Newborns) के लिए भी 18 साल से कम उम्र के नाबालिगों के लिए माता-पिता या कानूनी अभिभावक आवेदन कर सकते हैं। 5 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए Passport 5 साल के लिए या 18 साल की उम्र होने तक मान्य होता है।

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मुख्य विवरण:
- उम्र सीमा: जन्म के तुरंत बाद से लेकर 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए Passport (माइनर Passport) बनवाया जा सकता है।
- प्रक्रिया: 5 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए Passport सेवा केंद्र पर उपस्थित होना अनिवार्य नहीं है, लेकिन 5 से 12 वर्ष के बच्चों के लिए अभिभावक के साथ जाना जरूरी हो सकता है।
- दस्तावेज़: जन्म प्रमाण पत्र, माता-पिता का Passport, और निवास प्रमाण पत्र आवश्यक है।
- वेधता (Validity): 18 साल से कम उम्र के बच्चों का Passport 5 साल या 18 साल की उम्र होने तक ही मान्य रहता है।
- तत्काल Passport: नवजात शिशुओं और नाबालिगों के लिए तत्काल योजना भी उपलब्ध है।

Passport का टाइमलाइन क्या होता है?
भारत में Passport मिलने का समय (timeline) आमतौर पर सामान्य (Normal) श्रेणी के लिए 30 से 45 दिन और तत्काल (Tatkal) श्रेणी के लिए 1 से 7 कार्यदिवस होता है। सामान्य प्रक्रिया में अपॉइंटमेंट के बाद पुलिस सत्यापन और दस्तावेज़ों की जांच होती है, जबकि तत्काल में पुलिस सत्यापन के आधार पर पासपोर्ट जल्द जारी किया जाता है।
विस्तृत Passport टाइमलाइन:
- सामान्य पासपोर्ट (Normal Passport):
- समय: 30 से 45 कार्यदिवस।
- प्रक्रिया: आवेदन जमा करने, पुलिस वेरिफिकेशन और प्रिंटिंग के बाद पासपोर्ट डाक द्वारा घर आता है।
- तत्काल पासपोर्ट (Tatkal Passport):
- समय: 1 से 3 कार्यदिवस (पुलिस सत्यापन के आधार पर)।
- योग्यता: जल्दी जरूरत होने पर, इसके लिए अतिरिक्त शुल्क लगता है।
- पासपोर्ट नवीनीकरण (Renewal): 15 से 20 दिनों के भीतर।
- पुलिस वेरिफिकेशन: अखिल भारतीय औसत 14 दिन है, लेकिन mPassport Police App वाले क्षेत्रों में यह 5 दिनों के भीतर भी हो सकता है।

समय को प्रभावित करने वाले कारक:
- पुलिस सत्यापन में लगने वाला समय सबसे महत्वपूर्ण होता है।
- दस्तावेज़ों में कोई कमी होने पर देरी हो सकती है।
इंडिया से कहाँ-कहाँ Passport के ज़रिए जा सकते हैं?
फरवरी 2026 की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय Passport की ताकत में सुधार हुआ है और अब भारतीय नागरिक बिना किसी पूर्व वीजा के 56 से 57 देशों की यात्रा कर सकते हैं। ‘Henley Passport Index 2026′ में भारत अब 75वें स्थान पर पहुंच गया है।
भारतीय नागरिक निम्नलिखित श्रेणियों के तहत विदेश यात्रा कर सकते हैं:
1. बिना Passport के यात्रा (Only ID Proof)
भारत के पड़ोसी देशों में जाने के लिए Passport की भी आवश्यकता नहीं है, केवल आधार कार्ड या वोटर आईडी जैसे सरकारी पहचान पत्र पर्याप्त हैं:
- नेपाल
- भूटान
2. पूरी तरह वीजा-मुक्त (Visa-Free)
इन देशों में जाने के लिए आपको पहले से कोई वीजा नहीं लेना होता, बस अपना वैध भारतीय Passport साथ रखना होता है:
- एशिया: थाईलैंड (अनिश्चित काल के लिए विस्तारित), मलेशिया (31 दिसंबर 2026 तक), मकाओ, कजाकिस्तान।
- अफ्रीका: मॉरीशस, सेनेगल, अंगोला, केन्या (ETA आवश्यक), रवांडा।
- कैरिबियन व अन्य: बारबाडोस, जमैका, फिजी, डोमिनिका, ग्रेनाडा, हैती, त्रिनिदाद और टोबैगो।
3. वीजा ऑन अराइवल (Visa on Arrival)
इन देशों में पहुँचने के बाद आपको हवाई अड्डे पर ही वीजा मिल जाता है:
- मालदीव (30 दिनों के लिए मुफ्त)
- इंडोनेशिया
- श्रीलंका (ETA के साथ)
- कंबोडिया
- जॉर्डन
- सेशेल्स
- म्यांमार, लाओस, और इथियोपिया
4. ई-वीजा (e-Visa)
कई देश भारतीयों को ऑनलाइन ई-वीजा की सुविधा देते हैं, जिसमें
- अल्बानिया,
- वियतनाम,
- अज़रबैजान, और
- रूस जैसे देश शामिल हैं।
महत्वपूर्ण जानकारी:
यात्रा पर जाने से पहले संबंधित देश की आधिकारिक वेबसाइट या Ministry of External Affairs (MEA) पर नवीनतम नियमों की जांच अवश्य करें, क्योंकि वीजा नीतियां राजनयिक संबंधों के आधार पर बदलती रहती हैं।

बजट 2026 के बाद जीएसटी में बड़ा बदलाव
बजट 2026 लागू होते ही बाजार में जीएसटी दरों में बदलाव का असर दिखने लगा है। सरकार ने आम लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कुछ जरूरी वस्तुओं पर टैक्स कम किया है, जबकि कुछ सुविधाजनक और लग्जरी सामानों पर जीएसटी बढ़ाया गया है। इन फैसलों का सीधा असर लोगों के मासिक खर्च और घरेलू बजट पर पड़ेगा।
रोजमर्रा की चीजों पर मिली राहत
इस बार दूध, दही, पैक्ड सब्जियां और कुछ घरेलू उपयोग की वस्तुओं पर जीएसटी कम किया गया है। साबुन और डिटर्जेंट जैसे सामान सस्ते होने से घर का खर्च कम महसूस होगा। सिलाई मशीन पर टैक्स घटने से छोटे कारोबारियों और घर से काम करने वाले लोगों को फायदा मिल सकता है।
शिक्षा से जुड़े सामान हुए सस्ते
कॉपी, किताबें और स्टेशनरी पर टैक्स घटाकर सरकार ने शिक्षा को प्राथमिकता दी है। इससे बच्चों की पढ़ाई का खर्च कम होगा और अभिभावकों को आर्थिक राहत मिल सकती है।
कुछ चीजें हुईं महंगी
जहां कई जरूरी सामान सस्ते हुए हैं, वहीं एयर कंडीशनर, महंगे सिनेमा टिकट और कुछ बैंकिंग सेवाओं पर जीएसटी बढ़ाया गया है। इससे मनोरंजन और कुछ डिजिटल सेवाओं का खर्च बढ़ सकता है।
आम लोगों के लिए क्या मायने
जीएसटी बदलाव के बाद खर्च की बेहतर योजना बनाना जरूरी हो गया है। जरूरी वस्तुओं पर बचत होगी, जबकि गैर-जरूरी खर्चों में सावधानी बरतकर लोग अपने बजट को संतुलित रख सकते हैं।










