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सुप्रीम कोर्ट की फटकार: मुफ्त बिजली और फ्रीबीज से विकास पर पड़ रहा असर

By Aditi Pandey

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Free electricity and freebies are affecting development सुप्रीम कोर्ट
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सोशल संवाद/डेस्क: तमिलनाडु में मुफ्त बिजली देने के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। शीर्ष अदालत ने सवाल उठाया कि बिजली शुल्क अधिसूचित होने के बाद बिना उपभोक्ताओं की आर्थिक स्थिति का आकलन किए सभी को मुफ्त बिजली देने का फैसला क्यों लिया गया। अदालत ने राज्यों में बढ़ती “फ्रीबी संस्कृति” पर चिंता जताते हुए कहा कि इस तरह की योजनाएं दीर्घकालिक विकास में बाधा बन सकती हैं।

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पीठ ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक दलों को केवल मुफ्त सुविधाएं बांटने के बजाय ऐसी योजनाएं बनानी चाहिए जो लोगों के जीवन स्तर में स्थायी सुधार लाएं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने टिप्पणी की कि जब कई राज्य पहले से आर्थिक दबाव में हैं, तब मुफ्त योजनाओं का विस्तार आर्थिक संतुलन को और कमजोर कर सकता है। उन्होंने यह भी पूछा कि राज्य अपनी वार्षिक आय का एक बड़ा हिस्सा विकास कार्यों और रोजगार सृजन में क्यों नहीं लगाते।

अदालत ने कहा कि यह मुद्दा किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश से जुड़ा है। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने जोर दिया कि सरकारों को अपने बजट में स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि किन योजनाओं पर कितना खर्च हो रहा है और उसका औचित्य क्या है। अदालत के अनुसार, कई राज्यों में विकास परियोजनाओं की तुलना में वेतन और मुफ्त सुविधाओं पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।

तमिलनाडु सरकार की मुफ्त बिजली योजना से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और अन्य पक्षों को नोटिस जारी किया है। साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि राज्यों को सार्वभौमिक मुफ्त सुविधाओं के बजाय रोजगार के अवसर बढ़ाने और आत्मनिर्भरता को प्रोत्साहित करने पर ध्यान देना चाहिए।

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