सोशल संवाद / डेस्क : ग्रामीण भारत में (AI) आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। हाल ही में जारी Youth AI Aspirations and Adoption Report के मुताबिक, गांवों में रहने वाले 55 प्रतिशत युवा अब रोजमर्रा के कामों में नियमित रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। यह रिपोर्ट Head Held High Foundation की पहल JanAI के तहत तैयार की गई है, जिसमें 3005 ग्रामीण युवाओं की राय शामिल है।

पढ़ाई और जॉब तैयारी में AI बना सहारा
सर्वे के अनुसार, 28 प्रतिशत युवा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का कभी-कभी उपयोग करते हैं, जबकि केवल 17 प्रतिशत ने बताया कि वे इसका इस्तेमाल नहीं करते। लगभग 40 प्रतिशत युवा ट्रांसलेशन के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सहारा लेते हैं, जिससे उन्हें अंग्रेजी समझने में मदद मिलती है। वहीं 33 प्रतिशत युवा स्कूल असाइनमेंट, रिज्यूमे और ऑनलाइन आवेदन लिखने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग कर रहे हैं।
हालांकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल बढ़ रहा है, लेकिन अभी केवल 14 प्रतिशत ग्रामीण युवा ही इससे सीधे आय अर्जित कर पा रहे हैं। अधिकतर युवा इसे सीखने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के साधन के रूप में अपना रहे हैं।

AI सर्टिफिकेशन को लेकर उत्साह
रिपोर्ट के अनुसार, 90 प्रतिशत से ज्यादा युवा सरकार से प्रमाणित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कोर्स में दाखिला लेना चाहते हैं। 61 प्रतिशत का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सर्टिफिकेशन से उनकी नौकरी के अवसर बेहतर होंगे।
JanAI पहल से गांव तक पहुंची आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिक्षा
पिछले एक साल में JanAI Initiative ने 16 राज्यों के 50 जिलों में 75,000 से ज्यादा युवाओं तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस शिक्षा और प्रशिक्षण पहुंचाया है। स्थानीय प्रशासन और शिक्षण संस्थानों के सहयोग से यह पहल गांवों तक डिजिटल साक्षरता फैलाने का काम कर रही है। लक्ष्य है कि 2029 तक 5 करोड़ नागरिकों को AI साक्षर बनाया जाए और 20 लाख छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कौशल से लैस किया जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण भारत के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस केवल तकनीक नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और नए अवसरों का जरिया बन रहा है। आने वाले समय में यदि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रोजगार का स्थायी स्रोत बनता है, तो इसका प्रभाव और भी व्यापक हो सकता है।











