सोशल संवाद/जमशेदपुर : किसी भी उद्योग की स्थापना के समय व उसके आगे संचालन के लिए केंद्रीय या राज्य प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड से पर्यावरणीय स्वीकृति का प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य है. यह प्रमाण पत्र उद्योगों व व्यवसायों को वायु और जल प्रदूषण मानकों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए जारी किया जाता है. पहला स्थापना की अनुमति (सीटीइ) व दूसरा संचालन की अनुमति (सीटीओ) प्रमाणपत्र है. अभी सीटीओ प्रमाणपत्र अलग-अलग वर्ग के उद्योगों के लिए पांच से 15 साल तक के लिए के लिए दिये जाते हैं, लेकिन अब केंद्र सरकार ने प्रमाणपत्र की अवधि बढ़ा कर पांच से 25 साल तक करने का निर्णय लिया है.

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बोर्ड के क्षेत्रीय पदाधिकारी जीतेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि राज्य प्रदूषण बोर्ड ने इसे फिलहाल लागू नहीं किया है. इस प्रावधान में कुछ शर्तों के साथ ही सीटीओ प्रमाणपत्र मिलेंगे. बीच में गड़बड़ी की शिकायत मिलने व पर्यावरणीय शर्तों का पालन नहीं होने पर प्रमाणपत्र रद्द हो जायेगा. इस समय रेड वर्ग के उद्योगों को पांच साल, ऑरेंज वर्ग के उद्योगों को 10 साल व ग्रीन वर्ग के उद्योगों को 15 सालों का सीटीओ प्रमाणपत्र मिलता है. अवधि समाप्ति के बाद जांच कर प्रमाणपत्र का नवीनीकरण किया जाता है.
बड़ा कंपनियों ने लगा रखा है मॉनिटरिंग सिस्टम :
सरायकेला- खरसावां जिले की कई बड़ी कंपनियों ने वायु व ध्वनि प्रदूषण की निगरानी करने वाला मॉनिटरिंग सिस्टम लगा रखा है. इनमें टाटा स्टील, अमलगम, आधुनिक पावर व ओसीएल शामिल हैं. मॉनिटरिंग सिस्टम पोर्टल से जुड़ा है, जिसके माध्यम से राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मुख्यालय रांची व केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को डाटा उपलब्ध कराता है. जिले में विभाग का अपना मॉनिटरिंग सिस्टम नहीं लगा है.









