सोशल संवाद/डेस्क : झारखंड के हजारीबाग जिले से एक बड़ी और विवादित कार्रवाई सामने आई है, जहां पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के घर पर बुलडोजर चलाया गया। यह कार्रवाई एनटीपीसी के चट्टी बरियातू कोल माइंस परियोजना क्षेत्र में की गई, जहां उनके साथ-साथ कई अन्य भू-रैयतों के मकानों को भी ध्वस्त कर दिया गया।

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जानकारी के मुताबिक, यह मकान करीब 15 साल पहले बनाया गया था और जिस जमीन पर यह स्थित था, उसे पहले ही कोयला खनन के लिए चिन्हित किया जा चुका था। प्रशासन और NTPC (NTPC) की ओर से लंबे समय से इन घरों को खाली करने के निर्देश दिए जा रहे थे। इसके बावजूद जब लोग नहीं हटे, तो आखिरकार गुरुवार को बुलडोजर चलाने की कार्रवाई की गई।
इस दौरान इलाके में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था, जिससे किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से इस मामले को लेकर तनाव का माहौल बना हुआ था। यहां तक कि कुछ आरोप यह भी लगे कि कंपनी के अधिकारियों के साथ टकराव की स्थिति उत्पन्न हुई थी, जिसके बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया।
बुलडोजर कार्रवाई के वक्त पूर्व विधायक निर्मला देवी भी घर में मौजूद थीं। घर टूटने के बाद योगेंद्र साव ने इस पूरी कार्रवाई पर कड़ा विरोध जताया है। उनका आरोप है कि बिना उचित मुआवजा दिए और पर्याप्त समय दिए बिना ही उनके घर को तोड़ दिया गया। उन्होंने राज्य सरकार और एनटीपीसी दोनों पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे अन्यायपूर्ण बताया है।
योगेंद्र साव ने यह भी कहा कि उन्हें इस कार्रवाई की जानकारी बाद में मिली, क्योंकि उस समय वह क्षेत्र में मौजूद नहीं थे। उन्होंने चेतावनी दी कि इस कार्रवाई का राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकता है और सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
वहीं, इस कार्रवाई के बाद स्थानीय भू-रैयतों और ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का आरोप है कि उन्हें बिना पुनर्वास की व्यवस्था किए ही बेघर किया जा रहा है। उनका कहना है कि जिन लोगों के घर तोड़े गए हैं, उनके लिए अब तक बुनियादी सुविधाओं जैसे सड़क, पानी, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित नहीं की गई हैं।
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रशासनिक संसाधनों का उपयोग कंपनी के समर्थन में किया गया, जिससे आम जनता के अधिकारों की अनदेखी हुई है। ग्रामीणों के अनुसार, यह केवल एक मकान तोड़ने का मामला नहीं है, बल्कि आजीविका और जीवन से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।
फिलहाल, यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है और आने वाले दिनों में इसके राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव और भी गहराने की संभावना है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या प्रभावित लोगों को न्याय और उचित पुनर्वास मिल पाएगा या नहीं।









