सोशल संवाद / डेस्क : देश में आरक्षण और धर्म परिवर्तन को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आया है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि अगर कोई व्यक्ति अपना धर्म बदलकर ईसाई या किसी अन्य धर्म को अपनाता है, तो उसे Scheduled Caste (SC) का दर्जा नहीं मिलेगा।

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क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?
सुप्रीम कोर्ट ने अपने हालिया फैसले में कहा कि SC दर्जा केवल हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के लोगों के लिए मान्य है।
अगर कोई व्यक्ति इन धर्मों के अलावा किसी अन्य धर्म, जैसे ईसाई धर्म को अपनाता है, तो उसका SC दर्जा स्वतः समाप्त हो जाता है।
SC/ST एक्ट का भी नहीं मिलेगा लाभ
कोर्ट ने यह भी साफ किया कि धर्म परिवर्तन के बाद व्यक्ति SC/ST (Prevention of Atrocities) Act के तहत सुरक्षा का दावा नहीं कर सकता।
यानी अगर कोई व्यक्ति ईसाई धर्म अपना चुका है, तो वह इस कानून के तहत केस दर्ज नहीं कर पाएगा।
किस मामले में आया यह फैसला?
यह फैसला एक ऐसे मामले में आया, जिसमें एक व्यक्ति ने ईसाई धर्म अपनाने के बाद SC/ST एक्ट के तहत केस दर्ज कराया था।
- हाई कोर्ट ने केस खारिज कर दिया
- इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा
- सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराया
क्यों खत्म होता है SC दर्जा?
कोर्ट के अनुसार:
- SC दर्जा ऐतिहासिक रूप से जाति आधारित भेदभाव से जुड़ा है
- यह व्यवस्था मुख्य रूप से हिंदू, सिख और बौद्ध समाज में लागू होती है
- अन्य धर्मों में जाति व्यवस्था मान्य नहीं मानी जाती
इसी आधार पर धर्म परिवर्तन के बाद SC दर्जा समाप्त माना जाता है।
क्या है इसका असर?
इस फैसले के बाद:
- धर्म परिवर्तन करने वाले लोगों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा
- SC/ST एक्ट की कानूनी सुरक्षा भी नहीं मिलेगी
- सामाजिक और कानूनी स्तर पर बड़ा प्रभाव देखने को मिल सकता है
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला धर्म और आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर एक अहम स्पष्टता देता है। हालांकि, यह विषय सामाजिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना हुआ है और आगे भी इस पर बहस जारी रह सकती है।










