सोशल संवाद / डेस्क : देश में एलपीजी की कमी के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाते हुए केरोसिन वितरण को लेकर नियमों में अहम ढील दी है। 29 मार्च को जारी गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, सरकार ने पेट्रोलियम सुरक्षा और लाइसेंसिंग नियमों में अस्थायी बदलाव करते हुए केरोसिन की सप्लाई को तेज करने का फैसला किया है।

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इस फैसले का उद्देश्य घरों तक ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करना है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
क्यों लिया गया यह फैसला?

सूत्रों के मुताबिक, ईरान से जुड़े वैश्विक तनाव के कारण ऊर्जा सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे भारत में एलपीजी की उपलब्धता पर असर पड़ा है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने वैकल्पिक ईंधन के रूप में केरोसिन की सप्लाई बढ़ाने का निर्णय लिया है।
1 राज्यों में लागू होंगे नए नियम
सरकार ने दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और गुजरात सहित कुल 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (PDS) के तहत बेहतर केरोसिन तेल (SKO) की एड-हॉक सप्लाई की अनुमति दी है। इससे उन क्षेत्रों में राहत मिलने की उम्मीद है जहां पहले केरोसिन की सप्लाई बंद कर दी गई थी।
क्या हैं नए नियम?
नए दिशा-निर्देशों के तहत:
- चुनिंदा पेट्रोल पंपों को केरोसिन स्टोर और बेचने की अनुमति
- केवल सरकारी तेल कंपनियों द्वारा संचालित आउटलेट्स को अनुमति
- एक आउटलेट अधिकतम 5,000 लीटर तक स्टॉक कर सकेगा
- हर जिले में अधिकतम 2 पेट्रोल पंपों को ही अनुमति मिलेगी
लाइसेंसिंग नियमों में भी राहत
सरकार ने पेट्रोलियम नियम, 2002 के तहत केरोसिन डीलरों और ट्रांसपोर्ट से जुड़े लाइसेंसिंग नियमों में भी छूट दी है। इसका मकसद स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट और डिस्ट्रीब्यूशन की प्रक्रिया को तेज करना है।
60 दिनों के लिए लागू होंगे नियम
यह नए नियम तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं और 60 दिनों तक या अगले आदेश तक प्रभावी रहेंगे। हालांकि, केरोसिन का उपयोग केवल खाना पकाने और रोशनी के लिए ही किया जा सकेगा। साथ ही, PESO (Petroleum and Explosives Safety Organization) के सभी सुरक्षा नियम पहले की तरह लागू रहेंगे।
क्या होगा इसका असर?
सरकार के इस फैसले से ग्रामीण और शहरी गरीब परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। मौजूदा ईंधन नेटवर्क के जरिए केरोसिन की सप्लाई तेजी से शुरू की जाएगी, जिससे ऊर्जा संकट का असर कम किया जा सके।









