सोशल संवाद/डेस्क : पश्चिम सिंहभूम जिले के डेरोवाँ रेलवे स्टेशन पर पिछले एक सप्ताह से टिकट काउंटर बंद होने की वजह से यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्टेशन तो चालू है, लेकिन बुनियादी सुविधा टिकट उपलब्धता ठप पड़ जाने से आम जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है।

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यात्रियों के सामने अजीब स्थिति बन गई है। यदि वे नियमों का पालन करते हुए टिकट लेने की कोशिश करें तो काउंटर बंद मिलता है, और बिना टिकट यात्रा करें तो वे खुद ही दोषी ठहराए जाते हैं। इस विरोधाभासी स्थिति ने रेलवे व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि टिकट काउंटर का संचालन करने वाली टेंडरधारी चाईबासा में बैठी है और जमीनी स्तर पर किसी तरह की निगरानी या जिम्मेदारी नहीं निभाई जा रही है। नतीजतन, डेरोवाँ स्टेशन पर यात्रियों को रोजाना असुविधा और अनिश्चितता झेलनी पड़ रही है।

हैरानी की बात यह है कि इस मुद्दे पर जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी लोगों को खटक रही है। आम जनता का कहना है कि स्टेशन का उद्घाटन तो कर दिया गया, लेकिन आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित नहीं की गईं। ऐसे में “विकास” के दावे खोखले नजर आ रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों ने रेलवे प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से जल्द से जल्द टिकट काउंटर शुरू कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था नहीं सुधरी, तो आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ेगा। यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस तरह आम जनता को बुनियादी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ रहा है।









