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एमजीएम के 400 करोड़ के भवन का फिर बदलेगा नक्शा, ‘पेशेंट फ्लो’ होगा सुगम

By Muskan Thakur

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सोशल संवाद/जमशेदपुर : करीब एक साल पहले 400 करोड़ रुपए की लागत से बनकर तैयार एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डिजाइन में फिर बदलाव किया जाएगा। 10 माह पहले 80 लाख रुपए खर्च कर साकची से डिमना स्थित नए परिसर में अस्पताल शिफ्ट हुआ था। हैरानी की बात है कि शिफ्टिंग के दौरान न तो इमरजेंसी सेवाओं के एकीकरण पर ध्यान दिया गया और न ही अस्पताल की बुनियादी जरूरतों पर। स्थिति यह है कि उद्घाटन के इतने समय बाद भी एमजीएम में पानी की भीषण किल्लत है। अस्पताल को अपनी जरूरत पूरी करने के लिए मानगो नगर निगम से रोजाना 8 से 10 टैंकर मंगवाने पड़ रहे हैं।

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इसलिए हो रहा बदलाव

स्वास्थ्य विभाग की हालिया जांच में सामने आया कि एमजीएम समेत राज्य के कई मेडिकल कॉलेजों में आईसीयू, सीसीयू, एचडीयू, ओटी, रेडियोलॉजी और डायग्नोस्टिक सेंटर वैज्ञानिक मानकों के अनुरूप नहीं हैं। इससे खासकर मरीजों को एक विभाग से दूसरे विभाग तक दौड़ना पड़ रहा है, जिससे इलाज में देरी हो रही है। इस सुधार के लिए रिम्स, रांची के छह विभागों के एक्सपर्ट्स, सदर अस्पताल के प्रतिनिधि और झारखंड राज्य भवन निर्माण निगम के अधिकारियों की एक विशेषज्ञ समिति गठित की गई है।

अब ऐसे बदलेगा अस्पताल का लेआउट

नई व्यवस्था “पेशेंट फ्लो” और “वर्क फ्लो” के वैज्ञानिक सिद्धांत पर आधारित होगी। इसके तहत ये बदलाव किए जाएंगे-

एक ही फ्लोर पर सेवाएंः

  • इमरजेंसी, आईसीयू, ओटी और रेडियोलॉजी एक ही फ्लोर पर लाए जाएंगे।
  • ट्रामा सेंटरः ग्राउंड फ्लोर पर मुख्य प्रवेश द्वार के पास होगा ताकि एंबुलेंस को त्वरित पहुंच मिल सके।
  • संक्रमण नियंत्रणः ओटी को पूरी तरह ‘स्टेराइल
  • जोन’ बनाया जाएगा, जहां मरीजों, कर्मियों और बायो-मेडिकल वेस्ट के आवागमन के लिए अलग लिफ्ट व कॉरिडोर होंगे।

सुविधाओं का केंद्रः

रेडियोलॉजी, लैब और ब्लड बैंक ऐसी जगह होंगे जहां से ओपीडी और इमरजेंसी दोनों के मरीज आसानी से पहुंच सकें।

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