सोशल संवाद / रांची : सारंडा के मंकी फॉरेस्ट में घिरे 53 नक्सलियों में से 15 झारखंड पुलिस की शरण में पहुंच गये हैं. सुरक्षा बलों की लगातार घेराबंदी, दबिश और वार्ता की पहल के बाद यह सफलता हाथ लगी है.

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इन नक्सलियों में माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य एक करोड़ के इनामी मिसिर बेसरा का खासमखास 10 लाख का इनामी जोनल कमांडर अश्विन भी शामिल है. इसके साथ ही 10 लाख रुपये का इनामी जोनल कमांडर चंदन लोहरा, पांच लाख का इनामी सबजोनल कमांडर सोहन पुनेई उर्फ रंगा, सबजोनल कमांडर माधई पात्रा, एरिया कमांडर दो लाख रुपये की इनामी रजनी मुदगम, एरिया कमांडर सलोमी मुंडा उर्फ पारूल और दस्ता सदस्यों में अनीशा, जेलानी और सपना सहित अन्य नक्सली शामिल हैं. इधर माधई पात्रा ने समाज की मुख्यधारा में लौटने का फैसला करते हुए पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. वह लंबे समय से बीमार चल रहा था. दावा किया जा रहा है कि वह मिसिर बेसरा से अनुमति लेकर पुलिस की शरण में आया है.
कुछ कहने से बच रहे हैं पुलिस अधिकारी:
इधर संबंधित पुलिस अधिकारी नक्सलियों के शरण में आने की खबर पर सीधे तौर पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं. संभावना जतायी जा रही है कि इन नक्सलियों से सूचना एकत्र कर पुलिस आगे कुछ और कार्रवाई करे.
नक्सल मामले से जुड़े अधिकारी बताते हैं कि आने वाले समय में पुलिस की शरण में आये नक्सलियों का विधिवत सरेंडर कराया जायेगा. दूसरा प्रयास पुलिस यह भी कर रही है कि सारंडा के मंकी फॉरेस्ट में बचे एक-एक करोड़ के इनामी मिसिर बेसरा और असीम मंडल सहित 35 से 38 नक्सलियों का भी सरेंडर करा दिया जाये. तब सबको एक साथ सरेंडर घोषित किया जाये. हालांकि इस पर पुलिस के शीर्ष स्तर पर निर्णय होना बाकी है. ज्ञात हो कि पिछले दिनों नक्सलियों के परिजनों को सारंडा बुलाकर पुलिस ने वार्ता के जरिये सरेंडर कराने की पहल की थी.
15 लाख रुपये की इनामी जोनल कमांडर श्रद्धा विश्वास उर्फ बेला कोलकाता में गिरफ्तार
झारखंड पुलिस की मोस्टवांटेड नक्सली श्रद्धा विश्वास उर्फ बेला को कोलकाता पुलिस ने गिरफ्तार किया है. उसको उत्तर काशीपुर इलाके में छापेमारी कर पकड़ा गया है. झारखंड पुलिस ने उस पर 15 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था. उस पर झारखंड में करीब 23 मामले दर्ज हैं. यह पश्चिम बंगाल और झारखंड के माओवादियों के बीच तालमेल का काम करती थी. बताया जा रहा है कि झारखंड में सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव के बाद बेला भागकर पश्चिम बंगाल चली गयी थी और भांगड़ के उत्तर काशीपुर में छिपकर रह रही थी.
शीर्ष नक्सली नरहरि ने तेलंगाना पुलिस के सामने किया सरेंडर हैदराबाद. शीर्ष माओवादी नेता पसानुरी नरहरि उर्फ संतोष ने अपनी पत्नी के साथ तेलंगाना पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया. मूल रूप से नरहरि प्रतिबंधित संगठन की केंद्रीय समिति समिति के सदस्य के सदस्य हैं, जबकि उनकी पत्नी माओवादी कार्यकर्ता है
तेलंगाना निवासी नरहरि प्रतिबंधित संगठन की केंद्रीय है, जबकि उनकी पत्नी माओवादी कार्यकर्ता हैं. तेलंगाना पुलिस ने हाल में कहा था कि तेलंगाना से केवल चार सक्रिय भूमिगत काडर राज्य के बाहर विभिन्न संगठनों में सक्रिय हैं.
इन चारों में से मुप्पला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति और पसानुरी नरहरि केंद्रीय समिति के सदस्य हैं, जबकि जेड रत्ना बाई और वार्ता शेखर राज्य समिति के सदस्य हैं. तेलंगाना पुलिस ने भाकपा (माओवादी) पार्टी के भूमिगत नेताओं और कार्यकर्ताओं से सशस्त्र संघर्ष छोड़ने, मुख्यधारा में पुनः शामिल होने की अपील की है. पुलिस ने पहले बताया था कि 10 अप्रैल तक मार्च 2024 से तेलंगाना पुलिस के समक्ष कुल 818 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है.










