सोशल संवाद / रांची : सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद राज्य के ओपन करेक्शनल इंस्टीट्यूट (ओपन जेल) की निगरानी के लिए मॉनिटरिंग कमेटी का गठन नहीं किए जाने और सुविधाओं की स्थिति पर रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करने पर झारखंड हाईकोर्ट ने शुक्रवार को राज्य सरकार के प्रति नाराजगी जताई।

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चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मुख्य सचिव को 10 दिनों के भीतर तीन सदस्यीय मॉनिटरिंग कमेटी गठित करने का निर्देश देते हुए कहा कि अब इस मामले में किसी प्रकार का अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा। अदालत ने 24 जून तक अनुपालन रिपोर्ट और राज्य के सभी ओपन जेलों की स्थिति, प्रबंधन तथा उपलब्ध सुविधाओं का विस्तृत ब्योरा प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
मामले की अगली सुनवाई 25 जून को होगी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कमेटी गठन के लिए आठ सप्ताह का अतिरिक्त समय मांगा, लेकिन अदालत ने इस मांग को खारिज कर दिया। सरकार की ओर से दायर हस्तक्षेप याचिका (आईए) पर टिप्पणी करते हुए अदालत ने कहा कि समय-विस्तार के लिए दिए गए कारण अस्पष्ट और तथ्यहीन हैं।
खंडपीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही मॉनिटरिंग कमेटी की संरचना निर्धारित कर चुका है। इसके बावजूद राज्य सरकार द्वारा ड्राफ्ट कमेटी तैयार करने की दलील समझ से परे है। अदालत ने यह भी कहा कि हस्तक्षेप याचिका के साथ कोई ड्राफ्ट तक संलग्न नहीं किया गया। न्यायालय ने टिप्पणी की है कि सरकार के रवैये से प्रतीत होता है कि वह सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशों के अनुपालन को लेकर गंभीर नहीं है।
3 सदस्यीय कमेटीमें होंगे ये सदस्य
अदालत ने निर्देश दिया कि मॉनिटरिंग कमेटी में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (झालसा) के कार्यकारी अध्यक्ष अथवा उनके नामित प्रतिनिधि, गृह सचिव या उनके द्वारा नामित अपर सचिव स्तर का अधिकारी तथा कारा विभाग का एक वरिष्ठ अधिकारी, जिसकी रैंक कम से कम डीआईजी स्तर की हो, शामिल किया जाए।









