सोशल संवद / डेस्क : अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते के बाद वैश्विक कच्चे तेल बाजार में राहत देखने को मिली है। इसके चलते आम लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या भारत में पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और एलपीजी की कीमतों में भी जल्द कमी आएगी। इस बीच केंद्र सरकार और पेट्रोलियम मंत्रालय की ओर से बड़ा बयान सामने आया है।

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ईंधन आपूर्ति को लेकर सरकार का आश्वासन
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है और किसी प्रकार की कमी नहीं है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार भारतीय रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं तथा पर्याप्त कच्चे तेल का भंडार उपलब्ध है।
सरकार ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और घबराकर ईंधन की अतिरिक्त खरीदारी से बचने की भी अपील की है।
क्या सस्ते होंगे पेट्रोल-डीजल?
अमेरिका-ईरान समझौते की खबर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। इससे भविष्य में ईंधन कीमतों पर दबाव कम होने की संभावना बनी है। हालांकि फिलहाल भारत में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक नीचे बनी रहती हैं, तभी इसका असर घरेलू ईंधन कीमतों पर दिखाई दे सकता है।
केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने क्या कहा?
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री Suresh Gopi ने कहा है कि ईंधन कीमतों की समीक्षा कच्चे तेल की उपलब्धता और आपूर्ति की स्थिति को देखते हुए की जाएगी। उन्होंने संकेत दिया कि अंतिम निर्णय संबंधित मंत्रालय और बाजार परिस्थितियों के आधार पर लिया जाएगा।
कीमतें घटने में क्यों लगता है समय?
पेट्रोल और डीजल की कीमतें केवल कच्चे तेल के दाम पर निर्भर नहीं करतीं। इनमें रिफाइनिंग लागत, परिवहन खर्च, कर (टैक्स), डीलर कमीशन और मुद्रा विनिमय दर जैसी कई चीजें शामिल होती हैं। यही कारण है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता होने के बावजूद घरेलू कीमतों में तुरंत बदलाव नहीं दिखता।
आम जनता को क्या उम्मीद?
फिलहाल सरकार ने ईंधन की उपलब्धता को लेकर राहत जरूर दी है, लेकिन पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और एलपीजी की कीमतों में तत्काल कटौती का कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है। हालांकि यदि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार नरम रहती हैं और आपूर्ति सामान्य बनी रहती है, तो आने वाले समय में उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।










