सोशल संवाद / रांची : झारखंड सरकार ने संविदा, दैनिक वेतनभोगी, एकमुश्त पारिश्रमिक और आउटसोर्स कर्मियों के नियमितीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने नियमित नियुक्ति के लिए नया फॉर्मूला तैयार कर वित्त एवं विधि विभाग से परामर्श मांगा है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद राज्य के हजारों कर्मियों के लिए स्थायी नौकरी का रास्ता आसान हो सकता है।

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प्रतियोगिता परीक्षा के साथ अनुभव को भी मिलेगा महत्व
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार नियमितीकरण के लिए कर्मियों को प्रतियोगिता परीक्षा में शामिल होना होगा। हालांकि, केवल परीक्षा के अंकों के आधार पर चयन नहीं होगा, बल्कि लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मियों को उनके अनुभव के आधार पर अतिरिक्त वेटेज भी प्रदान किया जाएगा।
सरकार का मानना है कि वर्षों से विभागों में कार्यरत कर्मियों के अनुभव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। इसी वजह से चयन प्रक्रिया में अनुभव को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है।
तीन वर्ष से अधिक सेवा वालों को मिलेगा लाभ
प्रस्ताव में स्पष्ट किया गया है कि अतिरिक्त वेटेज का लाभ केवल उन कर्मियों को मिलेगा, जिन्होंने कम से कम 36 माह (तीन वर्ष) की सेवा पूरी कर ली है। इससे सचिवालय, क्षेत्रीय कार्यालयों, बोर्ड-निगमों और अन्य सरकारी संस्थानों में कार्यरत हजारों कर्मचारियों को फायदा मिलने की उम्मीद है।
अनुभव के आधार पर ऐसे मिलेगा वेटेज
सरकार द्वारा तैयार प्रारूप के अनुसार अनुभव के आधार पर निम्नलिखित अतिरिक्त अंक दिए जा सकते हैं—
- 36 माह के अनुभव पर : 0.15 प्रतिशत वेटेज
- 37 से 40 माह तक : 0.60 प्रतिशत वेटेज
- 60 माह से अधिक अनुभव पर : 3.60 प्रतिशत वेटेज
- 120 माह से 136 माह तक अनुभव पर : 15 प्रतिशत तक का वेटेज
इस व्यवस्था से लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मियों की नियमित नियुक्ति की संभावना और मजबूत हो सकती है।
मनरेगा कर्मियों की हड़ताल भी हुई समाप्त
इधर, झारखंड राज्य मनरेगा कर्मचारी संघ की ओर से 12 मार्च 2026 से चल रही अनिश्चितकालीन हड़ताल भी समाप्त हो गई है। ग्रामीण विकास विभाग के साथ हुई सकारात्मक वार्ता के बाद संघ ने 19 जून को आंदोलन वापस लेने की घोषणा की।
संघ के प्रतिनिधियों और विभागीय अधिकारियों के बीच हुई बैठक में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनी। इनमें 10 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके कर्मियों को ग्रेड पे के दायरे में लाने की प्रक्रिया शुरू करना, दिवंगत कर्मियों के आश्रितों को नियुक्ति में प्राथमिकता देना तथा मनरेगा कर्मचारियों को मुख्यमंत्री अबुआ स्वास्थ्य सुरक्षा योजना से जोड़ना शामिल है।
हजारों कर्मचारियों की उम्मीदें बढ़ीं
सरकार की इस पहल को राज्य के संविदा और मनरेगा कर्मियों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है। यदि प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो वर्षों से नियमितीकरण की मांग कर रहे हजारों कर्मचारियों को स्थायी सेवा का लाभ मिल सकता है।










