सोशल संवाद / रांची: झारखंड में सहायक शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया के बीच कुछ ऐसे मामले सामने आए हैं, जिन्होंने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। राज्य सरकार की ओर से हाल ही में हजारों चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए, लेकिन इनमें कुछ शिक्षक ऐसे भी रहे जिन्हें नियुक्ति पत्र मिलने के अगले ही दिन सेवानिवृत्त होना पड़ा। वहीं, एक शिक्षक को तो रिटायरमेंट के बाद नियुक्ति पत्र मिला।
नियुक्ति के साथ ही पूरी हो गई सेवा अवधि

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने रांची में आयोजित कार्यक्रम में नवनियुक्त शिक्षकों को नियुक्ति पत्र सौंपे। इस दौरान कुछ ऐसे शिक्षक भी शामिल थे जिनकी आयु 60 वर्ष पूरी होने वाली थी। परिणामस्वरूप, नियुक्ति पत्र प्राप्त करने के अगले ही दिन उनकी सेवा अवधि समाप्त हो गई। कुछ मामलों में अभ्यर्थी नियुक्ति पत्र मिलने से पहले ही निर्धारित सेवानिवृत्ति आयु पूरी कर चुके थे।
नियमों की वजह से बनी यह स्थिति
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2023 में सहायक शिक्षक भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। उस समय पारा शिक्षकों के लिए अधिकतम आयु सीमा 58 वर्ष निर्धारित थी। कई अभ्यर्थियों ने 57–58 वर्ष की आयु में आवेदन किया था, लेकिन भर्ती प्रक्रिया पूरी होने में समय लगने के कारण वर्ष 2026 तक उनकी आयु 60 वर्ष हो गई। इसी कारण नियुक्ति मिलने के साथ ही वे सेवानिवृत्ति की श्रेणी में पहुंच गए।
जामताड़ा के शिक्षक अगले दिन हुए रिटायर
जामताड़ा के शिक्षक नंदलाल रवानी को 29 जून को नियुक्ति पत्र मिला, लेकिन 30 जून को उनकी आयु 60 वर्ष पूरी होने के कारण वे सेवानिवृत्त हो गए। उन्होंने बताया कि वे वर्ष 2006 से पारा शिक्षक के रूप में कार्यरत थे और शिक्षक पात्रता परीक्षा (JTET) उत्तीर्ण करने के बाद भर्ती प्रक्रिया में शामिल हुए थे। लंबे इंतजार के बाद नियुक्ति तो मिली, लेकिन सेवा देने का अवसर लगभग नहीं मिल पाया।
रिटायरमेंट के बाद मिला नियुक्ति पत्र
पलामू के शिक्षक मो. नियूम अंसारी का मामला भी चर्चा में है। वे 31 मई 2026 को ही सेवानिवृत्त हो चुके थे, जबकि उन्हें 29 जून को नियुक्ति पत्र लेने के लिए बुलाया गया। उन्होंने कहा कि अब यह नियुक्ति पत्र उनके लिए एक यादगार दस्तावेज बनकर रहेगा।
भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवाल
इन घटनाओं के सामने आने के बाद शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया की समयसीमा और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि चयन प्रक्रिया समय पर पूरी होती, तो कई शिक्षकों को नियुक्ति मिलने के बाद सेवा देने का अवसर मिल सकता था।










