सोशल संवाद / नई दिल्ली: कांग्रेस ने महाराष्ट्र सरकार की ‘मुख्यमंत्री लाडकी बहीण योजना’ को लेकर भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्टी का दावा है कि विधानसभा चुनाव के बाद सरकार ने बड़ी संख्या में महिलाओं को योजना से बाहर कर दिया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह कदम चुनावी वादों से पीछे हटने और पात्र महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित करने जैसा है।

यह भी पढे : महाराष्ट्र की ‘लाडकी बहिन योजना’ पर कांग्रेस का हमला, जयराम रमेश बोले- लाखों महिलाओं के साथ हुआ धोखा
नई दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रवक्ता अतुल लोंढे पाटिल ने कहा कि चुनाव से पहले शुरू की गई इस योजना से अब तक करीब 38 प्रतिशत लाभार्थी महिलाओं को बाहर किया जा चुका है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में यह आंकड़ा 50 प्रतिशत से अधिक हो सकता है।
62 लाख महिलाओं को e-KYC के नाम पर हटाने का आरोप
अतुल लोंढे पाटिल ने आरोप लगाया कि सरकार ने e-KYC पूरी नहीं होने का हवाला देकर करीब 62 लाख महिलाओं को योजना से बाहर कर दिया। इसके अलावा लगभग 1.80 लाख महिलाओं को 65 वर्ष से अधिक आयु का बताते हुए भी लाभार्थियों की सूची से हटा दिया गया।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब आवेदन के समय महिलाओं ने आधार कार्ड जमा किए थे, तो सरकार के पास उनकी जन्मतिथि पहले से उपलब्ध थी। ऐसे में बाद में उम्र का आधार बनाकर नाम हटाना उचित नहीं है।
गरीब महिलाओं के लिए तकनीकी प्रक्रिया बनी परेशानी
कांग्रेस नेता ने कहा कि ग्रामीण और गरीब परिवारों की कई महिलाओं के पास स्मार्टफोन तक उपलब्ध नहीं हैं, फिर भी उनसे e-KYC कराने की अपेक्षा की जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ऑनलाइन आवेदन में दिए गए जटिल कैप्चा कोड सामान्य और अशिक्षित महिलाओं के लिए समझना बेहद कठिन है, जिससे पात्र लाभार्थियों को योजना से बाहर किया जा रहा है।
योजना के संचालन पर भी उठाए सवाल
अतुल लोंढे पाटिल ने कहा कि महाराष्ट्र में इस योजना के संचालन के लिए कोई अलग कार्यालय या स्पष्ट प्रशासनिक व्यवस्था नहीं है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकारों द्वारा शुरू की गई योजनाओं के लिए स्पष्ट प्रक्रिया और अलग कार्यालय होते थे, जबकि इस योजना में पारदर्शिता की कमी दिखाई देती है।
चुनावी वादे पूरे नहीं करने का आरोप
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव से पहले सरकार ने महिलाओं को हर महीने 1,500 रुपये देने की शुरुआत की थी और चुनाव के बाद इसे बढ़ाकर 2,100 रुपये प्रति माह करने का वादा किया था। लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद न केवल राशि नहीं बढ़ाई गई, बल्कि विभिन्न कारणों का हवाला देकर लाखों महिलाओं के नाम लाभार्थी सूची से हटा दिए गए।
वित्तीय प्रबंधन पर भी कांग्रेस के सवाल
प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस नेता ने कैग (CAG) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया कि जिस परियोजना के लिए लगभग 29,732 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे, उस पर 33,237 करोड़ रुपये खर्च किए गए। उन्होंने अतिरिक्त खर्च को लेकर सरकार से जवाब मांगा और पूरे मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की।
कांग्रेस की प्रमुख मांगें
कांग्रेस ने राज्य सरकार से मांग की है कि—
- e-KYC के आधार पर योजना से बाहर हुई 62 लाख पात्र महिलाओं का सत्यापन प्रशासन स्वयं कराए और उनका लाभ तुरंत बहाल किया जाए।
- योजना से महिलाओं को बाहर करने के निर्णय की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- योजना के क्रियान्वयन में हुई कथित अनियमितताओं, अपात्र लोगों को लाभ दिए जाने और सरकारी धन के दुरुपयोग की जांच कर दोषी अधिकारियों एवं जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।
(नोट: यह समाचार महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रवक्ता अतुल लोंढे पाटिल द्वारा प्रेस वार्ता में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। इन आरोपों पर महाराष्ट्र सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया इस समाचार में शामिल नहीं है।)










