सोशल संवाद/डेस्क : जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का असर अब केवल मौसम और पर्यावरण तक सीमित नहीं रह गया है। एक नई स्टडी के अनुसार, बढ़ते तापमान के कारण दुनिया भर में लोगों की नींद प्रभावित हो रही है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि औसतन हर व्यक्ति साल में करीब 56 घंटे की नींद खो रहा है।

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गर्म रातें बन रहीं नींद की सबसे बड़ी दुश्मन
विशेषज्ञों के मुताबिक, रात के समय तापमान सामान्य से अधिक रहने पर शरीर का तापमान संतुलित नहीं हो पाता, जिससे अच्छी और गहरी नींद लेना मुश्किल हो जाता है। लगातार गर्म रातों की वजह से लोगों में नींद की कमी की समस्या तेजी से बढ़ रही है।
भारत समेत कई देशों पर ज्यादा असर
अध्ययन में बताया गया है कि गर्म और आर्द्र जलवायु वाले देशों में इसका प्रभाव अधिक देखा जा रहा है। भारत के कई बड़े शहरों में भी बढ़ते तापमान के कारण लोगों की नींद पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तापमान में वृद्धि का यही सिलसिला जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
सेहत पर पड़ सकते हैं गंभीर प्रभाव
पर्याप्त नींद न मिलने से शरीर और दिमाग दोनों प्रभावित होते हैं। लगातार नींद की कमी से हृदय रोग, मोटापा, तनाव, अवसाद, कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली और कार्यक्षमता में गिरावट जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। विशेषज्ञ लोगों को गर्मी के मौसम में कमरे को ठंडा रखने, पर्याप्त पानी पीने और नियमित नींद का समय बनाए रखने की सलाह दे रहे हैं।
विशेषज्ञों की सलाह
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन से होने वाले स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों को कम करने के लिए व्यक्तिगत सावधानियों के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण और तापमान नियंत्रण के लिए दीर्घकालिक कदम उठाना भी आवश्यक है। बढ़ती गर्म रातें केवल मौसम की चुनौती नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी एक बड़ी चिंता बनती जा रही हैं।









