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प्रियंका गांधी बोलीं- प्रधानमंत्री मोदी सच्चाई से बहुत दूर हो चुके हैं, उनके शासन में युवाओं के साथ घोर अन्याय हुआ

By Riya Kumari

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प्रियंका गांधी बोलीं- प्रधानमंत्री मोदी सच्चाई से बहुत दूर हो चुके हैं, उनके शासन में युवाओं के साथ घोर अन्याय हुआ

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सोशल संवाद / नई दिल्ली  ; कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सच्चाई से बहुत दूर हो चुके हैं और उनके शासन में युवाओं के साथ घोर अन्याय हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर देश का युवा निराश हो गया और उसकी उम्मीद टूट गई तो सबसे बड़ी हार भारत की होगी। उन्होंने जोर देकर कहा, “हम कांग्रेस के लोग जान दे देंगे, लेकिन भारत की हार नहीं होने देंगे।”

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मंगलवार शाम को लोकसभा में लोक परीक्षा संशोधन विधेयक पर चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी ने अपने बेहद प्रभावशाली संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी इस सच को स्वीकार करें कि उनके शासन में युवाओं के साथ घोर अन्याय हुआ है। वे छात्रों के उज्ज्वल भविष्य के लिए जिम्मेदारी लेकर ठोस कदम उठाएं और विशेषज्ञों, अध्यापकों, छात्रों समेत सभी हितधारकों से बातचीत कर नई शिक्षा प्रणाली तैयार की जाए। शिक्षा व्यवस्था में आरएसएस के लोगों की जगह योग्यता वाले लोग भरे जाएं। रोजगार सृजन के लिए सख्त कदम उठाएं जाएं और चिकित्सा शिक्षा का विस्तार हो।

प्रियंका गांधी ने दिल्ली में पेपर लीक के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ हुई बर्बरता पर गहरा आक्रोश जताया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से पूछा कि क्या वे छात्र आतंकवादी थे? उन्होंने यह सवाल भी किया कि निहत्थे छात्रों पर बल प्रयोग करने का आदेश किसने दिया? देश के युवाओं पर पैलेट गन, एके-47 चलवाने की क्या जरूरत थी? कांग्रेस सांसद ने जोर देकर कहा कि ये सवाल सिर्फ कांग्रेस पार्टी नहीं, बल्कि सभी देशवासी पूछ रहे हैं।

प्रियंका गांधी ने कहा कि छात्रों को लगने लगा है कि देश में मेहनत से ज्यादा बेईमानी मायने रखती है और योग्यता से अधिक पैसा मायने रखता है। उन्होंने कहा कि बार-बार पेपर लीक हो रहे हैं। युवाओं का भरोसा सिस्टम से टूट चुका है, उनके भरोसे को फिर से कायम करने के लिए सिस्टम के दायरे से बाहर निकलकर ठोस प्रयास करने पड़ेंगे। उन्होंने अफसोस जताया कि मोदी सरकार यह बात समझ नहीं पा रही है और उसे अब भी लगता है कि पीआर और पालतू मीडिया के सहारे उसकी नैया पार हो जाएगी। उन्होंने प्रधानमंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि वे ‘कैमरे का एंगल नहीं, दिल का एंगल बदलें’। उन्होंने कहा कि जेन-ज़ी बेहद जागरूक और समझदार है; वे झूठ को तुरंत पहचान लेते हैं।

उन्होंने आगे कहा कि आज सदन में जिस विधेयक के संशोधन पर चर्चा हो रही है, वह 2024 में पारित हुआ था। इसमें मुख्य संशोधन यही है कि पेपर लीक के अपराधियों के लिए सजा बढ़ाई जाएगी, लेकिन सच्चाई यह है कि अभी तक एक भी अपराधी को सजा मिली ही नहीं है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले छात्रों की तस्वीरें फेस रिकोग्निशन तकनीक से सार्वजनिक की जा रही हैं, जबकि यह काम पेपर लीक करने वाले अपराधियों के लिए नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि इस विधेयक में पेपर लीक रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं हैं।

कांग्रेस महासचिव ने कहा कि सिर्फ नई-नई समितियां बनाने से काम नहीं चलेगा। उन्होंने याद दिलाया कि सरकार द्वारा बनाई गई राधाकृष्णन कमेटी की ज्यादातर सिफारिशें आज तक लागू नहीं हुई हैं। उन्होंने यह भी कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट्स का रिकॉर्ड पहले से ही बहुत खराब है और पेपर लीक मामले में सोमवार की सुनवाई में सीबीआई का वकील पेश ही नहीं हुआ था।

उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद भाजपा सांसदों द्वारा संसद परिसर में उनके स्वागत पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे सत्ताधारी दल का अहंकार करार दिया। उन्होंने अफसोस व्यक्त करते हुए यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने एक ऐसा नया शिक्षा मंत्री चुना, जिसने एक गर्भवती महिला के बलात्कारियों की रिहाई पर सहमति व्यक्त की थी। उन्होंने सवाल किया कि ऐसा करके प्रधानमंत्री मोदी ने देश की करोड़ों लड़कियों को क्या संदेश दिया?

प्रियंका गांधी ने कहा कि मोदी सरकार के शासन में देश ने चुनाव में वोटों की चोरी, राम मंदिर में चंदे की चोरी, उद्योगपतियों द्वारा देश की संपत्ति की चोरी और किसानों की जमीन की चोरी देखी है। लेकिन सबसे बड़ी चोरी युवाओं के सपनों और उनके भविष्य की हुई है।

कांग्रेस महासचिव ने यह भी कहा कि आज शिक्षा व्यवस्था में कई खामियां भर गई हैं। कई बच्चे दबाव में आकर जान दे देते हैं। बच्चों की पढ़ाई के लिए परिवारों पर भी भारी दबाव है और उन्हें कर्ज लेना पड़ता है। उसके बावजूद बच्चों के अच्छे भविष्य की कोई गारंटी नहीं है। उन्होंने कहा कि मौजूदा मोदी सरकार ने रोजगार पैदा करने वाले सेक्टर्स को कमजोर कर दिया है। पिछले एक दशक में 150 से अधिक पेपर लीक हुए हैं, जिससे 7.5 करोड़ युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है।

इसके बावजूद पेपर लीक माफिया के किसी व्यक्ति को सजा नहीं मिली। हर साल घटते देश के शिक्षा बजट पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि देश का वार्षिक शिक्षा बजट 1.4 लाख करोड़ रुपये है, जबकि नीट परीक्षा देने वाले लगभग 22 लाख छात्रों के परिवार संयुक्त रूप से हर साल 1.32 लाख करोड़ रुपये परीक्षा की तैयारी पर खर्च कर देते हैं। उन्होंने सरकार की प्राथमिकताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वह चंद अरबपतियों का 16 लाख करोड़ रुपये का कर्ज माफ कर देती है।

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