सोशल संवाद/डेस्क : केरल के नाम को लेकर बड़ा बदलाव हुआ है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने वाले विधेयक को मंजूरी दे दी है। संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही यह विधेयक कानून बन गया है।

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अब आधिकारिक तौर पर राज्य को ‘केरलम राज्य’ के नाम से जाना जाएगा। इस बदलाव के पीछे राज्य सरकार और विधानसभा की ओर से लंबे समय से चली आ रही मांग प्रमुख वजह रही है।
संसद के दोनों सदनों से पारित हुआ विधेयक
केरल का नाम बदलने से जुड़ा केरल (नाम परिवर्तन) विधेयक, 2026 पहले लोकसभा में पारित हुआ। इसके बाद राज्यसभा ने भी विधेयक को मंजूरी दे दी।
संसद से मंजूरी मिलने के बाद विधेयक राष्ट्रपति के पास भेजा गया था। अब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिलने के साथ ही नाम परिवर्तन की कानूनी प्रक्रिया पूरी हो गई है।
केरल का नाम ‘केरलम’ क्यों किया गया?
राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने नाम बदलने के पीछे की प्रक्रिया की जानकारी दी थी।
उन्होंने बताया था कि केरल विधानसभा ने वर्ष 2024 में एक प्रस्ताव पारित किया था। इस प्रस्ताव के जरिए केंद्र सरकार से राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के लिए आवश्यक कानून बनाने का अनुरोध किया गया था।
इसके बाद केंद्र सरकार ने इस मांग के आधार पर नाम परिवर्तन से जुड़ा विधेयक संसद में पेश किया।
अब आधिकारिक नाम होगा ‘केरलम राज्य’
विधेयक में प्रावधान किया गया है कि मौजूदा ‘केरल राज्य’ को अब ‘केरलम राज्य’ के नाम से जाना जाएगा।
नाम परिवर्तन के साथ केंद्र और राज्य सरकार के आधिकारिक दस्तावेजों, कानूनों और सरकारी रिकॉर्ड में भी नए नाम को लागू करने की प्रक्रिया शुरू होगी।
नाम बदलने का क्या असर होगा?
नाम बदलने के बाद राज्य की पहचान से जुड़े आधिकारिक रिकॉर्ड और सरकारी दस्तावेजों में ‘केरलम’ नाम का इस्तेमाल किया जाएगा। हालांकि, आम बोलचाल में ‘केरल’ नाम का इस्तेमाल कुछ समय तक जारी रहना स्वाभाविक है।
यह बदलाव मुख्य रूप से कानूनी और आधिकारिक नाम से जुड़ा है।









