सोशल संवाद/डेस्क : MMDR Amendment Bill 2026 को लेकर झारखंड में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने विधेयक का समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विरोध पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय झारखंड के विकास और खनिज संपदा के बेहतर इस्तेमाल के नजरिए से देखना चाहिए।

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रांची स्थित बीजेपी कार्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान संजय सेठ ने कहा कि विधेयक का उद्देश्य अवैध माइनिंग पर रोक लगाना और वैध खनन को बढ़ावा देकर आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करना होना चाहिए।
‘झारखंड को ओडिशा और पश्चिम बंगाल से करनी होगी प्रतियोगिता’
संजय सेठ ने कहा कि झारखंड जैसे खनिज संपदा वाले राज्य को यह देखना चाहिए कि ओडिशा और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में खनन और उत्पादन किस तरह हो रहा है।
उन्होंने कहा कि सवाल यह होना चाहिए कि कौन राज्य ज्यादा उत्पादन कर रहा है और कौन बेहतर लागत पर खनिज उपलब्ध करा सकता है। उनके मुताबिक, अगर लागत के बजाय एकरूपता और प्रतिस्पर्धी व्यवस्था पर जोर दिया जाए तो इसका फायदा झारखंड को भी मिल सकता है।
‘लैंडिंग कॉस्ट में बड़ा अंतर, इसे पाटना होगा’
केंद्रीय मंत्री ने खनिज की कीमतों में अंतर का उदाहरण देते हुए कहा कि सभी राज्यों की लैंडिंग कॉस्ट करीब ₹1,221 के स्तर पर है, लेकिन ओडिशा में यह करीब ₹1,708 और झारखंड में करीब ₹2,460 बताई जा रही है।
उन्होंने कहा कि इस अंतर को कम करना जरूरी है। ऐसा होने पर राज्य की आर्थिक स्थिति को और मजबूत किया जा सकता है।
‘विकसित भारत के चश्मे से देखना होगा MMDR Bill’
संजय सेठ ने कहा कि MMDR Bill को ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य से जोड़कर देखने की जरूरत है। उनके मुताबिक, खनन क्षेत्र के विकास का असर सिर्फ उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे बेहतर अस्पताल, स्कूल और शिक्षा जैसी सुविधाओं को भी बढ़ावा मिल सकता है।
उन्होंने कहा कि खनिज संपदा का इस्तेमाल इस तरह होना चाहिए कि उसका लाभ राज्य के आम लोगों तक पहुंचे।
झारखंड में 11 कोल ब्लॉक की लीज, एक भी शुरू नहीं हुआ: संजय सेठ
संजय सेठ ने झारखंड और ओडिशा के बीच खनन गतिविधियों की तुलना करते हुए कहा कि पिछले वित्तीय वर्ष में झारखंड में 11 कोल ब्लॉक की लीज हुई, लेकिन इनमें से एक भी अभी चालू नहीं हुआ।
वहीं, उनके मुताबिक ओडिशा में 79 कोल ब्लॉक में से 35 इस अवधि में चालू हो गए। उन्होंने कहा कि झारखंड को अपनी प्रक्रिया और उत्पादन व्यवस्था में तेजी लाने की जरूरत है।
हेमंत सोरेन के विरोध पर संजय सेठ ने जताई नाराजगी
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा MMDR संशोधन विधेयक का विरोध किए जाने पर संजय सेठ ने कहा कि इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने के बजाय राज्य के हित में देखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह विधेयक किसी राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा नहीं, बल्कि देश के विकास का एजेंडा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब भगवान ने देश को खनिज संपदा दी है, तो उसका एक-एक ग्राम देश के विकास में इस्तेमाल क्यों नहीं होना चाहिए?
‘मुख्यमंत्री को विधेयक का स्वागत करना चाहिए था’
केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार ने दृढ़ इच्छाशक्ति के साथ यह विधेयक लाकर राज्यों के विकास के बारे में सोचा है। उनका कहना था कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को इसका विरोध करने के बजाय इसका स्वागत करना चाहिए था।
संजय सेठ ने दावा किया कि खनन क्षेत्र में प्रस्तावित बदलावों से झारखंड की तस्वीर और तकदीर बदलने में मदद मिल सकती है।









