सोशल संवाद / डेस्क : भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्टफोन मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर आने वाले वर्षों में बड़ी छलांग लगाने की तैयारी में है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संकेत दिया है कि Apple भारत में iPhone के अलावा दूसरे प्रोडक्ट्स का निर्माण भी बढ़ा सकता है। वहीं, सरकार को उम्मीद है कि Google अपने निर्यात के लिए होने वाले उत्पादन का बड़ा हिस्सा चीन से भारत में शिफ्ट करेगा।

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सरकार की ₹62,000 करोड़ की Mobile Phone Manufacturing Scheme (MPMS) के लॉन्च के बाद भारत को ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में इसे बड़ा कदम माना जा रहा है।
iPhone के अलावा दूसरे Apple Products भी भारत में बन सकते हैं
अश्विनी वैष्णव से जब पूछा गया कि क्या Apple भारत में iPhone के अलावा दूसरे प्रोडक्ट्स का निर्माण कर सकता है, तो उन्होंने ‘हां’ में जवाब दिया।
हालांकि, मंत्री ने यह स्पष्ट नहीं किया कि Apple भारत में भविष्य में किन-किन उत्पादों का निर्माण शुरू कर सकता है। लेकिन उनके बयान से संकेत मिलता है कि भारत में Apple का मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन नेटवर्क और व्यापक हो सकता है।
Apple ने वर्ष 2017 में भारत में iPhone की असेंबलिंग शुरू की थी। इसके बाद Foxconn और Tata Group जैसे मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर्स के जरिए कंपनी ने देश में अपना उत्पादन लगातार बढ़ाया है। चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति के तहत Apple ने भारत को अपने ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है।
2026 में ग्लोबल iPhone Production में भारत की हिस्सेदारी बढ़ेगी
Counterpoint Research के अनुमान के मुताबिक, 2026 में ग्लोबल iPhone उत्पादन में भारत की हिस्सेदारी करीब 26 फीसदी तक पहुंच सकती है। भारत अब सिर्फ घरेलू बाजार के लिए उत्पादन केंद्र नहीं रह गया है, बल्कि यहां बने स्मार्टफोन बड़े पैमाने पर दूसरे देशों को भी निर्यात किए जा रहे हैं।
Google भी चीन से भारत ला सकता है बड़ा उत्पादन हिस्सा
Apple के साथ-साथ Google Pixel Manufacturing को लेकर भी भारत के लिए अच्छी खबर है। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार को उम्मीद है कि विदेशी बाजारों के लिए Google के उत्पादन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा भारत में आएगा।
Google ने 2024 में भारत में Pixel स्मार्टफोन का उत्पादन शुरू किया था। कंपनी ने इसके लिए Dixon Technologies जैसे भारतीय मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर्स के साथ काम किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Google आने वाले वर्षों में चीन में Pixel डिवाइस के उत्पादन को कम कर भारत और वियतनाम जैसे देशों में उत्पादन बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
अगले 10-14 महीनों में उभर सकते हैं 3 भारतीय Smartphone Brands
सरकार सिर्फ विदेशी कंपनियों के भारत में उत्पादन बढ़ाने पर ध्यान नहीं दे रही है। घरेलू स्मार्टफोन कंपनियों को मजबूत करने की भी योजना है। अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, सरकार अगले 10 से 14 महीनों में तीन संभावित भारतीय स्मार्टफोन कंपनियों के उभरने की उम्मीद कर रही है।
इन कंपनियों को अलग-अलग सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार किया जा रहा है। इनमें:
- Affordable Smartphone
- Mid-Range Smartphone
- Premium Smartphone
- Super-Premium Smartphone
जैसे सेगमेंट शामिल हैं।
सरकार का फोकस ऐसे भारतीय ब्रांड तैयार करने पर है जिनके पास अपना Design, Intellectual Property (IP), Brand और मजबूत Manufacturing Ecosystem हो।
क्या है ₹62,000 करोड़ की MPMS Scheme?
सरकार ने मोबाइल फोन निर्माण को बढ़ावा देने के लिए Mobile Phone Manufacturing Scheme (MPMS) शुरू की है। इस योजना का कुल आकार करीब ₹62,000 करोड़ है। यह योजना 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी और 2030-31 तक जारी रहने का प्रस्ताव है।
MPMS के दो प्रमुख हिस्से हैं:
- बड़े पैमाने पर मोबाइल फोन निर्माण को बढ़ावा देना।
- भारतीय स्वामित्व वाले Smartphone Brands, IP, Design और R&D को प्रोत्साहित करना।
कंपनियों को मिलेगा 5 फीसदी तक Incentive
योजना के तहत पात्र कंपनियों को बिक्री के आधार पर 2.5 फीसदी से 5 फीसदी तक वित्तीय प्रोत्साहन मिल सकता है। इसके अलावा घरेलू Components की Sourcing और भारतीय Design एवं R&D को भी अतिरिक्त प्रोत्साहन देने का प्रावधान है।
एक पात्र भारतीय ब्रांड को बिक्री पर 5 फीसदी तक प्रोत्साहन के साथ निर्धारित Components की घरेलू सोर्सिंग पर अतिरिक्त 1.5 फीसदी तक और भारतीय Design तथा R&D के लिए 3 फीसदी तक अतिरिक्त प्रोत्साहन मिल सकता है।
भारतीय Smartphone Brand बनने के लिए क्या जरूरी?
सरकार के अनुसार, किसी कंपनी को भारतीय Smartphone Brand के रूप में पात्र होने के लिए कई शर्तें पूरी करनी होंगी।
कंपनी:
- भारत में Registered या Incorporated होनी चाहिए।
- भारत में Intellectual Property और Trademark का स्वामित्व होना चाहिए।
- Management Control भारतीय नागरिकों के पास होना चाहिए।
- 51 फीसदी से अधिक भारतीय Shareholding होनी चाहिए।
- भारत में अपनी R&D और Design क्षमता विकसित करनी होगी।
सरकार यह सुनिश्चित करने की तैयारी में है कि योजना के तहत मिलने वाला लाभ वास्तव में भारत में डिजाइन और स्वामित्व वाले ब्रांडों को ही मिले।
मोबाइल उत्पादन ₹40 लाख करोड़ तक पहुंचने का लक्ष्य
अश्विनी वैष्णव के मुताबिक, पिछली PLI योजना के दौरान मोबाइल फोन का कुल उत्पादन करीब ₹20 लाख करोड़ रहा। नई MPMS योजना के तहत इसे लगभग दोगुना कर ₹40 लाख करोड़ तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
सरकार की योजना के अनुसार, MPMS के तहत कुल अनुमानित उत्पादन करीब ₹39 लाख करोड़ और मोबाइल निर्यात का लक्ष्य लगभग ₹15 लाख करोड़ रखा गया है। इससे मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग और इससे जुड़े क्षेत्रों में करीब 60,000 प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।
किन कंपनियों को MPMS का लाभ मिलेगा?
भारत में Registered Mobile Phone Manufacturers जिनका वित्त वर्ष 2026 में न्यूनतम कारोबार ₹10,000 करोड़ रहा है, वे MPMS के लिए पात्र हो सकते हैं।
वहीं, Electronics Manufacturing Services यानी EMS कंपनियों के लिए वित्त वर्ष 2026 में न्यूनतम कारोबार की सीमा ₹1,000 करोड़ रखी गई है। मौजूदा ब्रांड्स को प्रोत्साहन का लाभ लेने के लिए निर्धारित अतिरिक्त बिक्री लक्ष्य भी पूरा करना होगा।
भारत को Global Electronics Hub बनाने की तैयारी
सरकार का लक्ष्य सिर्फ मोबाइल फोन का उत्पादन बढ़ाना नहीं है। इसके जरिए पूरे Electronics Ecosystem को मजबूत करने की योजना है।
इससे:
- Component Manufacturers
- MSMEs
- Logistics Companies
- Supply Chain Partners
- Material Manufacturers
- Electronics Exporters
को भी फायदा मिलने की उम्मीद है।









