सोशल संवाद / झारखंड : झारखंड का देवघर आमतौर पर बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए देशभर में प्रसिद्ध है। वहीं इसके पड़ोसी जिले जामताड़ा की पहचान लंबे समय से साइबर अपराध के मामलों से जुड़ी रही है। लेकिन अब साइबर ठगी का दायरा जामताड़ा तक सीमित नहीं रह गया है। देवघर में भी साइबर ठगी का नेटवर्क तेजी से फैलने की बात सामने आ रही है।

आसान और कम समय में ज्यादा पैसा कमाने की चाह में जिले के कुछ युवा और किशोर साइबर अपराध के इस अवैध धंधे में शामिल होते जा रहे हैं। पुलिस की लगातार कार्रवाई के बावजूद साइबर ठग अपना ठिकाना बदलकर दूसरे शहरों और राज्यों से ठगी का नेटवर्क संचालित करने की कोशिश कर रहे हैं।
देवघर में बढ़ रहा साइबर ठगी का नेटवर्क
देवघर के कई ग्रामीण इलाकों में साइबर ठगी से जुड़े मामलों में पुलिस कार्रवाई कर चुकी है। स्थानीय पुलिस के अलावा दूसरे राज्यों की पुलिस भी साइबर अपराध के आरोपितों की तलाश में देवघर पहुंच रही है।
हाल ही में पश्चिम बंगाल पुलिस की एक टीम देवघर पहुंची। टीम कथित तौर पर साइबर ठगी गिरोह के सरगना अहमद अंसारी और उसके साथियों की तलाश में जांच कर रही थी। जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि देवघर से जुड़े कुछ साइबर ठग दूसरे राज्यों में होटल या किराए के मकानों में रहकर ठगी का नेटवर्क चला रहे थे।
बंगाल के होटल से 11 साइबर ठगी के आरोपित गिरफ्तार
पश्चिम बंगाल पुलिस की कार्रवाई में एक होटल से 11 साइबर ठगी के आरोपितों को पकड़े जाने की बात सामने आई है। पुलिस अब आरोपितों से मिली जानकारी के आधार पर आगे की जांच और छापेमारी कर रही है।
जांच में अहमद अंसारी को गिरोह का कथित सरगना बताया गया है। पुलिस के अनुसार वह तकनीकी जानकारी रखता है और कथित तौर पर फर्जी APK फाइल तैयार करने में माहिर है। बताया गया है कि वह गिरोह में शामिल युवकों को फर्जी APK फाइल और संभावित शिकार के फोन नंबर उपलब्ध कराता था। ठगी के बाद रकम का एक हिस्सा कथित तौर पर उसके पास पहुंचता था।
पुलिस की सख्ती बढ़ी तो बदले ठिकाने
साइबर अपराध के खिलाफ देवघर पुलिस की कार्रवाई तेज होने के बाद कई आरोपितों के दूसरे शहरों में जाकर ठगी करने की जानकारी सामने आई है।
बताया जाता है कि कुछ साइबर ठग रांची, धनबाद और पश्चिम बंगाल जैसे स्थानों पर होटल या किराए के मकान लेकर अपना नेटवर्क चलाने लगे। पश्चिम बंगाल में हुई कार्रवाई के दौरान पकड़े गए आरोपितों से पुलिस इसी नेटवर्क के बारे में जानकारी जुटा रही है।
छत्तीसगढ़ पुलिस भी पहुंची सारठ
पश्चिम बंगाल पुलिस के बाद छत्तीसगढ़ पुलिस की चार सदस्यीय टीम भी देवघर जिले के सारठ थाना पहुंची। टीम ने सुखजोरा गांव निवासी पंकज रवानी और प्रमोद कुमार रवानी से संबंधित संपत्ति का ब्योरा सारठ अंचल अधिकारी से मांगा है।
बताया गया है कि छत्तीसगढ़ पुलिस लाखों रुपये की कथित साइबर ठगी से जुड़े मामले की जांच कर रही है। पुलिस दोनों की तलाश के साथ-साथ उनकी संपत्ति और कथित तौर पर ठगी से अर्जित धन की जांच भी कर रही है।
सुखजोरा गांव क्यों आया चर्चा में?
सारठ का सुखजोरा गांव पहले भी साइबर अपराध से जुड़े मामलों को लेकर चर्चा में रहा है। विभिन्न राज्यों की पुलिस यहां पहले भी छापेमारी कर चुकी है।
बताया जाता है कि साइबर ठगी के आरोपितों को गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस टीम पर हमला भी हो चुका है। वहीं गांव के करीब एक दर्जन युवकों की साइबर ठगी के मामलों में गिरफ्तारी और जेल जाने की बात भी सामने आई है। इसी वजह से सुखजोरा गांव पुलिस की साइबर अपराध जांच में एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में सामने आया है।
कभी मजदूरी करते थे पिता, बेटे पर साइबर ठगी का आरोप
सुखजोरा से जुड़े मामलों में यह भी चर्चा है कि आर्थिक रूप से सामान्य परिवारों के कुछ युवा साइबर ठगी के जरिए कम समय में बड़ी संपत्ति बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि साइबर अपराध से जुड़े मामलों के कारण गांव की पुरानी छवि प्रभावित हुई है। ग्रामीणों के बीच इस बात को लेकर चिंता है कि आसानी से पैसा कमाने का लालच युवाओं को अपराध की ओर धकेल रहा है।
देवघर में साइबर अपराध पुलिस के लिए बड़ी चुनौती
देवघर में साइबर ठगी के खिलाफ स्थानीय पुलिस के साथ-साथ दूसरे राज्यों की पुलिस की कार्रवाई से साफ है कि यह अपराध अब राज्य की सीमाओं से बाहर फैले नेटवर्क का रूप ले रहा है।
होटल, किराए के मकान और अलग-अलग शहरों से ऑपरेट करने की कोशिश पुलिस के लिए चुनौती बढ़ा रही है। ऐसे में साइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए स्थानीय पुलिस और दूसरे राज्यों की एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय अहम माना जा रहा है।
देवघर में साइबर ठगी के मामलों पर पुलिस की कार्रवाई आगे भी जारी रहने की उम्मीद है। वहीं युवाओं को साइबर अपराध के इस जाल से दूर रखना प्रशासन और समाज दोनों के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।









