एमजीएम में करोड़ों की योजनाएं, फिर भी मरीज टैंकर के पानी और ऑक्सीजन सिलेंडर पर निर्भर

By Tamishree Mukherjee

Published :

Follow
Crores spent on schemes at MGM, yet patients remain dependent on tanker water

Join WhatsApp

Join Now

सोशल संवाद / जमशेदपुर : डिमना में एमजीएम अस्पताल शुरू हुए एक साल से अधिक समय बीत चुका है। भवन और चिकित्सीय सुविधाओं पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए हैं, लेकिन मरीजों के इलाज की दो सबसे बुनियादी जरूरतें पानी और ऑक्सीजन, अब भी पूरी तरह पटरी पर नहीं आ सकी हैं।

यह भी पढ़े : इंजीनियरिंग व पॉलिटेक्निक कॉलेजों में खाली सीटों पर सीधे दाखिले का मौका

जिला प्रशासन द्वारा तय की गई डेडलाइन बीत जाने के बाद भी अस्पताल को टैंकर, बोरिंग व पंप के सहारे जलापूर्ति करनी पड़ रही है। 31 अगस्त तक सभी मरीजों को पाइपलाइन से ऑक्सीजन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन पाइपलाइन नेटवर्क अधूरा होने के कारण दर्जनों बेड तक अब भी सिलेंडर के जरिए ही ऑक्सीजन पहुंचाई जा रही है।

प्रमुख बुनियादी समस्याएं और वर्तमान स्थिति

8.69 करोड़ की जलापूर्ति योजना अधर मेंः

सुवर्णरेखा नदी से अस्पताल तक 3.5 किमी लंबी पाइपलाइन बिछाकर प्रतिदिन 30 लाख लीटर (3) एमएलडी) पानी सप्लाई करने की योजना है। 15 जून की समय सीमा खत्म होने के बाद अब वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और अंतिम कनेक्शन के काम में करीब एक माह और लगने की संभावना है।

ऑपरेशन थिएटर से सफाई तक प्रभावितः

पानी की किल्लत के कारण अस्पताल में पिछले चार महीनों में 50 से अधिक गंभीर ऑपरेशन टालने या स्थगित करने पड़े हैं। इसके अलावा संक्रमण नियंत्रण और सफाई व्यवस्था पर भी असर पड़ रहा है।

ऑक्सीजन सप्लाई में तकनीकी बाधाएं:

मेडिकल कॉलेज भवन के पीछे 1800 लीटर क्षमता की लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन (LMO) टंकी तो स्थापित हो चुकी है, लेकिन ‘मेडिकल गैस पाइपलाइन सिस्टम’ के जरिए इसे प्रत्येक वार्ड और बेड से जोड़ना अब भी बाकी है।

साकची का पीएसए प्लांट होगा शिफ्टः
साकची स्थित पुराने एमजीएम परिसर के पीएसए ऑक्सीजन प्लांट को डिमना शिफ्ट करने के लिए जगह चिह्नित कर ली गई है, लेकिन इसकी स्थापना व परीक्षण में समय लगेगा।

YouTube Join Now
Facebook Join Now
Social Samvad MagazineJoin Now
---Advertisement---