गो-माता की महिमा से गूंजेगा जमशेदपुर, संस्कार और सेवा का जलेगा दीप

By Tamishree Mukherjee

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Jamshedpur to Resonate with the Glory of the Divine Cow

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सोशल संवाद / जमशेदपुर : लौहनगरी जमशेदपुर आगामी 18, 19 एवं 20 सितंबर को भक्ति, आस्था, सनातन संस्कृति और गो-सेवा के संदेश से सराबोर होने जा रही है। शहर के बिष्टुपुर स्थित कुसुम कमानी ऑडिटोरियम में तीन दिवसीय भव्य “श्री गो कृपा कथा महोत्सव” का आयोजन किया जा रहा है। इस आध्यात्मिक महोत्सव में देश के सुप्रसिद्ध गो-कथावाचक पूज्य ग्वाल श्री जी महाराज अपने श्रीमुख से गो-माता की महिमा, सनातन संस्कृति, जीव दया, सेवा और भारतीय जीवन-पद्धति के विभिन्न आयामों पर कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक संदेश प्रदान करेंगे।

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इस आयोजन का उद्देश्य केवल धार्मिक कथा का श्रवण कराना नहीं, बल्कि गो-माता के प्रति श्रद्धा को गो-सेवा, गो-संरक्षण, जीव दया और सामाजिक जिम्मेदारी के भाव से जोड़ना है। पूर्वी सिंहभूम जिला अग्रवाल सम्मेलन, ध्यान फाउंडेशन (चाकुलिया) एवं श्री गोपाल परिवार संघ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित यह महोत्सव जमशेदपुर के सामाजिक एवं धार्मिक आयोजनों में एक विशेष अध्याय जोड़ने जा रहा है।

तीन दिन भक्ति, कथा और गो-महिमा का होगा अद्भुत संगम

तीनों दिन कथा का आयोजन शाम 4:00 बजे से 7:00 बजे तक किया जाएगा। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से विशेष आग्रह किया है कि कथा के सुचारु संचालन, अनुशासन एवं सभी श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए तीनों दिन अपराह्न 3:45 बजे तक कुसुम कमानी ऑडिटोरियम में पहुंचकर अपनी सीट ग्रहण कर लें।

आयोजकों को उम्मीद है कि जमशेदपुर एवं आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु परिवार सहित इस आध्यात्मिक आयोजन में शामिल होंगे।

गो-माता : भारतीय संस्कृति की करुणा, सेवा और समृद्धि का प्रतीक

भारतीय सनातन परंपरा में गो-माता का स्थान अत्यंत श्रद्धापूर्ण एवं विशिष्ट रहा है। भगवान श्रीकृष्ण की गो-सेवा एवं गो-चारण की लीलाओं से लेकर भारतीय ऋषि-मुनियों की जीवन-पद्धति तक, गौवंश भारतीय सभ्यता और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहा है।

गो-माता को भारतीय परंपरा में ममता, करुणा, त्याग, सेवा, समृद्धि और जीव दया का प्रतीक माना गया है। गो-कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को इसी व्यापक सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक दृष्टिकोण से परिचित कराने का प्रयास किया जाएगा।

आयोजकों का मानना है कि गो-सेवा केवल धार्मिक भावना नहीं, बल्कि समाज में करुणा, संवेदना और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने का माध्यम भी है। आज जब नई पीढ़ी अपनी पारंपरिक जीवन-पद्धति और सांस्कृतिक मूल्यों से तेजी से दूर होती जा रही है, ऐसे आयोजन उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकते हैं।

गो-कथा के माध्यम से गो-सेवा और जीव दया का संदेश

“श्री गो कृपा कथा महोत्सव” के माध्यम से समाज के बीच यह संदेश पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा कि गो-माता के प्रति श्रद्धा केवल पूजा तक सीमित न रहे, बल्कि वह सेवा, संरक्षण और संवेदना में भी दिखाई दे।

आयोजकों के अनुसार गो-सेवा का अर्थ केवल गौशालाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीव मात्र के प्रति दया, प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और समाज में सेवा-भाव को बढ़ावा देने की व्यापक भावना है।

श्री राज कुमार अग्रवाल : “गो-कथा मनुष्य को सेवा और संवेदना से जोड़ने का माध्यम”

श्री राज कुमार अग्रवाल, निदेशक, ध्यान फाउंडेशन, चाकुलिया ने कहा कि गो-माता भारतीय संस्कृति और हमारी जीवन-पद्धति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि गो-माता के प्रति हमारी श्रद्धा व्यवहारिक रूप से गो-सेवा और जीव दया में परिवर्तित हो।

विजय आनंद मूनका ने कहा कि “श्री गो कृपा कथा महोत्सव” के माध्यम से लोगों को गो-माता की महिमा के साथ-साथ सेवा और संरक्षण के महत्व से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह कथा परिवारों और विशेष रूप से युवाओं को अपनी संस्कृति एवं संस्कारों से जोड़ने का सुंदर अवसर प्रदान करेगी।

श्री संदीप मुरारका : “सनातन संस्कृति की शक्ति उसके संस्कार और सेवा-भाव में है”

संदीप मुरारका, अध्यक्ष, झारखंड प्रादेशिक अग्रवाल सम्मेलन ने कहा कि सनातन संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता उसकी व्यापकता, सहिष्णुता और सेवा-भाव है। गो-माता के प्रति श्रद्धा हमारी इसी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि गो-कथा के माध्यम से समाज में संस्कार, करुणा और सेवा की भावना को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने जमशेदपुरवासियों से आह्वान किया कि वे परिवार सहित तीनों दिन कथा में उपस्थित होकर इस आध्यात्मिक आयोजन का लाभ उठाएं और इसे जनभागीदारी का महोत्सव बनाएं।

अभिषेक अग्रवाल गोल्डी : “युवाओं को संस्कृति से जोड़ना आयोजन की बड़ी प्राथमिकता”

अभिषेक अग्रवाल गोल्डी, महामंत्री, झारखंड प्रादेशिक अग्रवाल सम्मेलन ने कहा कि किसी भी संस्कृति की निरंतरता तभी बनी रहती है, जब नई पीढ़ी उसके मूल्यों और परंपराओं से जुड़ी रहे।

उन्होंने कहा कि “श्री गो कृपा कथा महोत्सव” के माध्यम से युवाओं एवं परिवारों को गो-सेवा, जीव दया, भारतीय संस्कृति और सेवा-भाव से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आयोजन को लेकर शहर में विशेष उत्साह है और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।

विजय आनंद मुनका, अभिषेक अग्रवाल गोल्डी एवं मंटू अग्रवाल के नेतृत्व में तैयारियां अंतिम चरण में

महोत्सव की तैयारियों को मुख्य संयोजक विजय आनंद मुनका के साथ अभिषेक अग्रवाल गोल्डी एवं मंटू अग्रवाल के संयुक्त मार्गदर्शन में अंतिम रूप दिया जा रहा है। आयोजन को भव्य एवं व्यवस्थित बनाने के लिए पूर्वी सिंहभूम जिला अग्रवाल सम्मेलन, ध्यान फाउंडेशन एवं श्री गोपाल परिवार संघ के पदाधिकारी, महिला मंडल और युवा कार्यकर्ता लगातार सक्रिय हैं।

कथा स्थल पर श्रद्धालुओं के बैठने, प्रवेश एवं स्वागत, अनुशासन, मंच व्यवस्था, प्रचार-प्रसार, सुरक्षा एवं अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को लेकर विभिन्न टीमों को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं।

समीक्षा बैठक में तैयारियों पर हुआ विस्तृत मंथन

महोत्सव की तैयारियों को लेकर आयोजित समीक्षा बैठक में आयोजन की विभिन्न व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में झारखंड प्रादेशिक अग्रवाल सम्मेलन के अध्यक्ष संदीप मुरारका, महामंत्री अभिषेक अग्रवाल गोल्डी , मुख्य संयोजक विजय आनंद मूनका के साथ-साथ नूपुर तुलस्यान, अनीता हरनाथका, श्यामा काँवटिया, राजदुलारी अग्रवाल, नितु हरनाथका, रानी अग्रवाल, सीमा जवानपुरिया, पायल अग्रवाल, कविता अग्रवाल, ज्योति अग्रवाल, संजना अग्रवाल, खुशबू काँवटिया, रीना गोयल, मनीषा संघी, अंजू चेतानी, दीपा अग्रवाल, अर्चना अग्रवाल, सुशीला संघी, सपना भाऊका, संजना अग्रवाल, अश्विनी कुमार अग्रवाल, मयूर संघी, संजय अग्रवाल, दीनदयाल काँवटिया, हेमंत गुप्ता, प्रकाश बजाज, बजरंग लाल अग्रवाल, बबलू अग्रवाल, ऋषि जालान, प्रतीक अग्रवाल, अंशुल रिंगसिया, मनोज गोयल, पीकू अग्रवाल, राजेश पंसारी, केशव गोयल, अमन गोयल, पीयूष गोयल, हर्ष बाँकरेवाल, दीपक चेतानी सहित अन्य सदस्यों ने सहभागिता की।

बैठक में कथा में अधिक से अधिक जनसहभागिता सुनिश्चित करने, श्रद्धालुओं की सुविधा, समयबद्ध कार्यक्रम संचालन तथा सभी व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश एवं सुझाव दिए गए।

महिलाओं और युवाओं की रहेगी विशेष भागीदारी

महोत्सव को सफल बनाने में महिला मंडल एवं युवा कार्यकर्ताओं की विशेष भूमिका रहेगी। आयोजकों का मानना है कि परिवार और समाज में संस्कारों को मजबूत करने तथा सनातन संस्कृति के संदेश को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में महिलाओं एवं युवाओं की सहभागिता अत्यंत महत्वपूर्ण है।

इसी उद्देश्य से आयोजन को केवल एक कथा कार्यक्रम न बनाकर भक्ति, संस्कार, सेवा और सामाजिक जागरूकता का सामूहिक मंच बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

जमशेदपुरवासियों से परिवार सहित पहुंचने का आग्रह

आयोजकों ने शहरवासियों से आग्रह किया है कि वे इस पावन अवसर पर परिवार सहित उपस्थित होकर पूज्य ग्वाल संत श्री गोपाल मणि जी महाराज के श्रीमुख से गो-महिमा का श्रवण करें। विशेष रूप से श्रद्धालुओं से आग्रह किया गया है कि तीनों दिन अपराह्न 3:45 बजे तक कुसुम कमानी ऑडिटोरियम पहुंचकर अपनी सीट ग्रहण कर लें, ताकि कथा का समय पर एवं व्यवस्थित रूप से शुभारंभ हो सके। आयोजकों ने कहा कि यह महोत्सव केवल कथा सुनने का अवसर नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति, संस्कार और सेवा-भाव से पुनः जुड़ने का अवसर है।

कार्यक्रम एक नजर में

कार्यक्रम: श्री गो कृपा कथा महोत्सव
कथावाचक: पूज्य ग्वाल संत श्री गोपाल मणि जी महाराज
विशेष मार्गदर्शन: श्री राज कुमार अग्रवाल जी, निदेशक, ध्यान फाउंडेशन, चाकुलिया
तिथि: 18, 19 एवं 20 सितंबर
समय: शाम 4:00 बजे से 7:00 बजे तक
विशेष आग्रह: तीनों दिन अपराह्न 3:45 बजे तक ऑडिटोरियम में अपनी सीट ग्रहण करें
स्थान: कुसुम कमानी ऑडिटोरियम, बिष्टुपुर, जमशेदपुर
आयोजक: पूर्वी सिंहभूम जिला अग्रवाल सम्मेलन, ध्यान फाउंडेशन (चाकुलिया) एवं श्री गोपाल परिवार संघ

संयोजक: विजय आनंद मुनका, अभिषेक अग्रवाल गोल्डी एवं श्री मंटू अग्रवाल

“गो-कथा के माध्यम से संस्कारों का संचार, गो-सेवा के माध्यम से समाज का उत्थान।”

आइए, परिवार सहित जुड़ें इस दिव्य आयोजन से और गो-माता की महिमा, सनातन संस्कृति तथा सेवा-भाव के इस पावन संदेश के साक्षी बनें।

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