सोशल संवाद / डेस्क : झारखंड के धनबाद जिले के निचितपुर में दो गहरे दोस्तों की दोस्ती की ऐसी कहानी सामने आई, जिसने पूरे इलाके को भावुक कर दिया। धीरेन दत्ता और पशुपति महतो ने जिंदगी के लंबे सफर में एक-दूसरे का साथ निभाया और संयोग ऐसा रहा कि दोनों ने एक ही दिन दुनिया को अलविदा कह दिया। दोनों का अंतिम संस्कार भी एक साथ किया गया।
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BCCL में साथ की नौकरी, जिंदगी भर कायम रही दोस्ती
रेंगुनी बस्ती निवासी धीरेन दत्ता (89) और बड़की बौआ गांव निवासी पशुपति महतो (71) लंबे समय तक कुसुंडा क्षेत्र की ईस्ट बसुरिया कोलियरी में साथ काम करते थे। नौकरी के दौरान बनी दोस्ती समय के साथ और गहरी होती चली गई। दोनों अलग-अलग समय पर सेवानिवृत्त हुए, लेकिन उनका आपसी रिश्ता बना रहा।
स्थानीय लोगों के अनुसार दोनों हर सुख-दुख में एक-दूसरे के साथ खड़े रहते थे। कुछ समय से दोनों बीमार भी चल रहे थे।
एक ही दिन घरों में हुई दोनों दोस्तों की मौत
रविवार को दोनों दोस्तों का अपने-अपने घरों में निधन हो गया। उम्र में अंतर होने के बावजूद दोनों के निधन का दिन एक होना लोगों के लिए बेहद भावुक कर देने वाला संयोग रहा।
इसके बाद सोमवार को दोनों का अंतिम संस्कार लिलौरी स्थान स्थित मुक्तिधाम में एक साथ किया गया। अंतिम विदाई के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और सभी ने दोनों की दोस्ती को याद किया।
दोस्ती की मिसाल बनी आखिरी यात्रा
धीरेन दत्ता और पशुपति महतो की दोस्ती अब निचितपुर इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। लोगों का कहना है कि दोनों की घनिष्ठता लंबे समय तक याद की जाएगी।
जिंदगी के लंबे सफर में साथ रहने वाले दोनों दोस्तों ने जिस तरह एक ही दिन दुनिया को अलविदा कहा और अंतिम यात्रा भी साथ की, वह उनकी दोस्ती को एक भावुक और यादगार मिसाल बना गया।










