सोशल संवाद / डेस्क : Tata Group के भीतर चल रहा विवाद अब कानूनी मोर्चे पर भी पहुंचता दिखाई दे रहा है। इस मामले में देश के वरिष्ठ वकील Harish Salve और Abhishek Manu Singhvi अलग-अलग पक्षों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। सिंहवी Tata Trusts की ओर से और साल्वे Tata Sons तथा उसके चेयरमैन N. Chandrasekaran के पक्ष से जुड़े हैं।
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दिलचस्प बात यह है कि इससे पहले Cyrus Mistry विवाद के दौरान दोनों वकील Tata Sons और Tata Trusts के पक्ष में साथ दिखाई दिए थे। अब मौजूदा विवाद में दोनों के कानूनी तर्क अलग-अलग हैं।
Abhishek Manu Singhvi ने उठाए Shareholder Rights के सवाल
Abhishek Manu Singhvi ने Tata Sons के फैसलों को लेकर shareholder rights और corporate governance से जुड़े सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि Tata Trusts की हिस्सेदारी और उससे जुड़े अधिकारों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। सिंहवी ने यह भी कहा है कि मौजूदा विवाद का समाधान अब कानूनी प्रक्रिया के जरिए हो सकता है।
सिंघवी ने Tata-Mistry मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया है। उनके अनुसार, उस फैसले में Tata Sons और Tata Trusts के संबंधों में Trusts की भूमिका को महत्व दिया गया था।
Harish Salve का Tata Sons की Listing पर जोर
दूसरी ओर, Harish Salve ने N. Chandrasekaran की दोबारा नियुक्ति का समर्थन किया है और Tata Sons की public listing के मुद्दे पर जोर दिया है। उनका तर्क है कि Tata Sons की listing होने से मौजूदा विवाद की एक बड़ी वजह बनने वाले private-company restrictions का प्रभाव खत्म हो सकता है।
Salve ने Tata Sons के आकार और उसके व्यापक आर्थिक प्रभाव का हवाला देते हुए regulatory oversight और corporate governance standards पर भी जोर दिया है।
विवाद के केंद्र में Chandrasekaran की दोबारा नियुक्ति और Listing
मौजूदा विवाद में Tata Sons के बोर्ड ने N. Chandrasekaran को पांच साल के एक और कार्यकाल के लिए Executive Chairman के रूप में दोबारा नियुक्त किया है। इसके बाद Tata Trusts की ओर से इस फैसले की वैधता पर सवाल उठाए गए हैं। साथ ही Tata Sons की proposed public listing भी दोनों पक्षों के बीच महत्वपूर्ण मुद्दा बनी हुई है।
Tata Trusts, जो Tata Sons में करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं, listing के मुद्दे पर अलग रुख रखते हैं। दूसरी ओर, Tata Sons बोर्ड listing की दिशा में आगे बढ़ने की स्थिति में है।
Tata Group में बढ़ सकता है कानूनी विवाद
दोनों पक्षों के वरिष्ठ वकीलों की सार्वजनिक दलीलों से संकेत मिलता है कि Tata Trusts और Tata Sons के बीच मतभेद अब corporate governance, shareholder rights, board powers और listing जैसे मुद्दों पर केंद्रित हो गए हैं। यदि आपसी स्तर पर समाधान नहीं निकलता है तो मामला कानूनी प्रक्रिया में आगे बढ़ सकता है।










