सोशल संवाद / डेस्क : आमतौर पर ई-रिक्शा लोगों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए किराया लेते हैं, लेकिन मथुरा के लोकेश ने अपनी सेवा को एक अलग पहचान दी है। वह बुजुर्गों और दिव्यांग लोगों को ई-रिक्शा से मुफ्त सफर कराते हैं।
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लोकेश की यह पहल जरूरतमंद लोगों के लिए मदद का जरिया बन रही है। उनका कहना है कि जिन लोगों को आने-जाने में परेशानी होती है, उन्हें सुविधा उपलब्ध कराना ही उनकी प्राथमिकता है।
बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए मुफ्त सफर
मथुरा की सड़कों पर चलने वाले ई-रिक्शा के बीच लोकेश का रिक्शा अपनी अलग पहचान बना रहा है। वह बुजुर्ग और दिव्यांग यात्रियों से किराया नहीं लेते। जरूरत पड़ने पर उन्हें उनके गंतव्य तक पहुंचाने में भी मदद करते हैं।
इस पहल का मकसद केवल मुफ्त यात्रा कराना नहीं, बल्कि ऐसे लोगों को सार्वजनिक परिवहन में आसानी और सम्मान के साथ सफर की सुविधा देना है।
सेवा को बनाया अपनी पहचान
लोकेश ने अपने काम को केवल कमाई का जरिया न बनाकर सामाजिक सेवा से जोड़ने की कोशिश की है। उनकी इस पहल की चर्चा स्थानीय स्तर पर भी हो रही है।
खासकर बुजुर्गों और दिव्यांग लोगों के लिए छोटी दूरी का सफर भी कई बार चुनौती बन जाता है। ऐसे में मुफ्त ई-रिक्शा सेवा उनके लिए उपयोगी साबित हो सकती है।
समाज के लिए एक संदेश
लोकेश की पहल यह संदेश देती है कि समाज में बदलाव लाने के लिए हमेशा बड़े संसाधनों की जरूरत नहीं होती। अपने काम के जरिए भी जरूरतमंद लोगों की मदद की जा सकती है।
मथुरा में लोकेश का यह प्रयास उन लोगों के लिए प्रेरणा बन रहा है जो अपने रोजमर्रा के काम के साथ समाज के लिए भी कुछ योगदान करना चाहते हैं।











