सोशल संवाद / डेस्क : चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR पूरा हो चुके राज्यों में ऑनलाइन Form 6 से SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा हटा दी है। इसका मतलब है कि ऐसे राज्यों में नया नाम जुड़वाने या SIR के दौरान नाम छूट जाने के बाद दोबारा मतदाता सूची में शामिल होने के लिए Form 6 भरते समय 2003 की पुरानी वोटर लिस्ट से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी नहीं देनी होगी।
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हालांकि, जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR की प्रक्रिया अभी जारी है, वहां Form 6 में यह अतिरिक्त घोषणा दिखाई दे सकती है। चुनाव आयोग ने यह बदलाव अपने ECINET पोर्टल और संबंधित CEO पोर्टल पर किया है।
पहले Form 6 में क्या जानकारी मांगी जा रही थी?
ऑनलाइन Form 6 में SIR से संबंधित एक अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई थी। इसमें आवेदक से उसके या माता-पिता/दादा-दादी के पिछले SIR के दौरान मतदाता सूची में दर्ज होने से संबंधित जानकारी मांगी जा रही थी। यह हिस्सा जुलाई 2026 में ऑनलाइन Form 6 में जोड़ा गया था, जबकि वैधानिक Form 6 में ऐसा बदलाव नहीं किया गया था।
अब जिन राज्यों में SIR पूरा हो चुका है, वहां यह अतिरिक्त हिस्सा हटा दिया गया है। ऐसे मामलों में आवेदक को निर्धारित Form 6 की सामान्य प्रक्रिया के तहत आवेदन करना होगा।
अगर SIR में नाम कट गया है तो क्या करें?
अगर किसी मतदाता का नाम SIR के दौरान मतदाता सूची से छूट गया है, तो वह Form 6 के जरिए दोबारा नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकता है। चुनाव आयोग के अनुसार SIR पूरा होने के बाद छूटे हुए लोगों और नए मतदाताओं के लिए लगातार अपडेट के तहत नाम शामिल कराने की प्रक्रिया उपलब्ध है। इसका मतलब यह नहीं है कि मतदाता बनने की पात्रता या आवेदन की जांच खत्म हो गई है। Form 6 की सामान्य प्रक्रिया और पात्रता संबंधी नियम लागू रहेंगे।
क्या 2003 की वोटर लिस्ट अब बेकार हो गई?
ऐसा नहीं है। चुनाव आयोग के SIR पोर्टल पर पिछली SIR की मतदाता सूची को खोजने की सुविधा अभी उपलब्ध है। आयोग के पोर्टल के मुताबिक 2002/2003 की अंतिम मतदाता सूची का डेटा संबंधित राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से प्राप्त हुआ है और उसे पोर्टल पर उपलब्ध कराया गया है। यानी पुरानी वोटर लिस्ट का इस्तेमाल रिकॉर्ड की जांच और जानकारी मिलाने के लिए हो सकता है, लेकिन SIR पूरा हो चुके राज्यों में Form 6 के साथ उस संबंध में अतिरिक्त घोषणा देना जरूरी नहीं रहेगा।
नए वोटर्स के लिए क्या बदलेगा?
पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं के लिए भी प्रक्रिया में यह बदलाव महत्वपूर्ण है। उन्हें Form 6 भरते समय SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा के तहत अपने माता-पिता या दादा-दादी के पुराने मतदाता रिकॉर्ड की जानकारी देने की जरूरत नहीं होगी, जहां SIR पूरा हो चुका है।
हालांकि, नए मतदाता को Form 6 में मांगी गई सामान्य जानकारी और पात्रता संबंधी विवरण देना होगा। चुनाव आयोग के नागरिक सेवा पोर्टल पर 18 वर्ष या उसके आसपास की आयु वाले पात्र नागरिकों के लिए Form 6 के जरिए नए मतदाता पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध है।
Form 6 में बदलाव को लेकर क्या विवाद था?
Form 6 में SIR से संबंधित अतिरिक्त घोषणा जोड़े जाने को लेकर चुनाव आयोग के भीतर भी सवाल उठे थे। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, आपत्ति इस बात को लेकर थी कि वैधानिक Form 6 में बदलाव के लिए निर्धारित नियमों की प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए।
इसके बाद 26 सितंबर की बैठक में आयोग ने कहा था कि SIR पूरा हो चुके राज्यों में सामान्य अवधि के दौरान नियमों के तहत निर्धारित Form का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके कुछ दिनों बाद SIR पूरा हो चुके राज्यों में ऑनलाइन Form 6 से अतिरिक्त घोषणा हटा दी गई।
अब मतदाताओं के लिए क्या समझना जरूरी है?
सीधे शब्दों में कहें तो SIR पूरा हो चुके राज्यों में Form 6 भरते समय 2003 की वोटर लिस्ट में माता-पिता या दादा-दादी का नाम होने संबंधी अतिरिक्त घोषणा नहीं देनी होगी। लेकिन मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए Form 6 की सामान्य प्रक्रिया, पात्रता और जरूरी जांच पहले की तरह जारी रहेगी।
नया Form 6 भरने या अपनी स्थिति जांचने के लिए चुनाव आयोग के Voters’ Services Portal पर मतदाता सेवाएं उपलब्ध हैं।











