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Jharkhand SIR: चंपाई सोरेन का JMM-कांग्रेस पर हमला, बोले- SIR को लेकर फैलाया जा रहा भ्रम

By Tamishree Mukherjee

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Champai Soren SIR
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सोशल संवाद / डेस्क : झारखंड में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने मंगलवार को जारी बयान में झामुमो और कांग्रेस पर SIR को लेकर लोगों के बीच भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि SIR को केवल चुनाव आयोग की प्रक्रिया के तौर पर देखने के बजाय मतदाता सूची की शुद्धता और राज्य के मूल निवासियों से जुड़े मुद्दों के संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए।

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चंपाई सोरेन ने दावा किया कि झारखंड में आदिवासी आबादी का प्रतिशत पिछले दशकों में कम हुआ है और उन्होंने इसके लिए कथित बांग्लादेशी घुसपैठ को जिम्मेदार बताया। हालांकि, यह उनके राजनीतिक बयान का हिस्सा है और इस दावे के कारणों पर अलग-अलग स्तर पर राजनीतिक और सामाजिक बहस होती रही है।

SIR को लेकर क्या बोले चंपाई सोरेन?

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्ताधारी दल SIR को चुनाव आयोग की कवायद और आदिवासियों के खिलाफ साजिश के तौर पर पेश कर रहे हैं। उनके मुताबिक, मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य पात्र मतदाताओं का रिकॉर्ड दुरुस्त करना और अपात्र, मृत, स्थानांतरित या डुप्लीकेट नामों की पहचान करना है।

उन्होंने कहा कि किसी पात्र मतदाता का नाम छूटने की स्थिति में संबंधित व्यक्ति को दावा या आपत्ति दर्ज कराने का अधिकार है। चुनाव आयोग की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, SIR के दौरान ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद दावे और आपत्तियां दाखिल करने के लिए निर्धारित अवधि होती है। आयोग ने झारखंड के लिए 5 अगस्त 2026 को ड्राफ्ट रोल और 7 अक्टूबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने का कार्यक्रम तय किया है।

1951 से 2011 के बीच आदिवासी आबादी के आंकड़े का जिक्र

चंपाई सोरेन ने अपने बयान में 1951 और 2011 की जनगणना के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि झारखंड क्षेत्र में आदिवासी आबादी का अनुपात 44 प्रतिशत से घटकर करीब 28 प्रतिशत रह गया। उन्होंने इस गिरावट को कथित घुसपैठ से जोड़ते हुए पाकुड़, साहिबगंज और राजमहल क्षेत्र की स्थिति पर सवाल उठाए। साथ ही जमीन, जनसंख्या और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को SIR से जोड़कर देखने की बात कही।

हालांकि, आदिवासी आबादी में बदलाव के कारणों को केवल एक कारण से जोड़ना एक राजनीतिक दावा है। जनगणना के आंकड़े आबादी के अनुपात में बदलाव दिखाते हैं, लेकिन उसके कारणों का आकलन अलग विषय है।

पाकुड़-साहिबगंज समेत संताल क्षेत्र का मुद्दा उठाया

चंपाई सोरेन ने पाकुड़, राजमहल और साहिबगंज इलाकों का जिक्र करते हुए जमीन और जनसांख्यिकी से जुड़े कई आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि कुछ इलाकों में आदिवासी परिवारों की संख्या में बदलाव हुआ है और जमीन से जुड़े मामलों में फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की शिकायतें सामने आती रही हैं।

उन्होंने पूर्वी सिंहभूम के चाकुलिया और सरायकेला-खरसावां के कपाली इलाके का भी जिक्र किया। इन मामलों में उनके द्वारा बताए गए आंकड़ों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस बयान से अलग से नहीं होती है।

‘किसी वास्तविक मतदाता का नाम नहीं कटेगा’

चंपाई सोरेन ने कहा कि SIR को लेकर यह धारणा गलत है कि दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने पर गरीब या वास्तविक मतदाताओं के नाम सीधे काट दिए जाएंगे। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि यदि ड्राफ्ट मतदाता सूची में उनका नाम नहीं है तो वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा और आपत्ति दर्ज करें।

चुनाव आयोग की व्यवस्था में मतदाता सूची से जुड़े दावे और आपत्तियों के लिए निर्धारित समय दिया जाता है। आयोग के Voters’ Services Portal पर मतदाता पंजीकरण, आवेदन की स्थिति और मतदाता सूची से जुड़ी विभिन्न सेवाएं उपलब्ध हैं।

2002-03 की पुरानी वोटर लिस्ट भी ऑनलाइन उपलब्ध

SIR के तहत पुराने मतदाता रिकॉर्ड को देखने की सुविधा भी चुनाव आयोग के पोर्टल पर उपलब्ध है। आयोग के SIR सर्च पेज के अनुसार संबंधित राज्यों की 2002/2003 की अंतिम मतदाता सूची का डेटा संबंधित मुख्य निर्वाचन अधिकारियों से प्राप्त कर पोर्टल पर उपलब्ध कराया गया है।

इसलिए मतदाता पुराने रिकॉर्ड में अपना या अपने परिजनों का नाम तलाश सकते हैं। हालांकि, पुराने रिकॉर्ड और मौजूदा मतदाता सूची में नाम की स्थिति अलग-अलग तरीके से जांची जा सकती है।

झारखंड में SIR की टाइमलाइन क्या है?

चुनाव आयोग के शेड्यूल के मुताबिक झारखंड उन राज्यों में शामिल है जहां SIR के इस चरण की प्रक्रिया चल रही है। झारखंड के लिए:

  • ड्राफ्ट मतदाता सूची: 5 अगस्त 2026
  • दावे और आपत्तियां: 5 अगस्त से 4 सितंबर 2026
  • दावे-आपत्तियों के निस्तारण की प्रक्रिया: 5 अगस्त से 3 अक्टूबर 2026
  • अंतिम मतदाता सूची: 7 अक्टूबर 2026

ये तारीखें चुनाव आयोग द्वारा जारी कार्यक्रम में दी गई हैं।

SIR को लेकर झारखंड में सियासत तेज

झारखंड में SIR सिर्फ मतदाता सूची के पुनरीक्षण तक सीमित नहीं रहा है। इसे लेकर सत्तारूढ़ दलों और विपक्षी नेताओं के बीच राजनीतिक बहस भी तेज है। चंपाई सोरेन ने अपने बयान में इसे आदिवासी और मूलवासी हितों, जमीन और जनसंख्या से जुड़े मुद्दों से जोड़ा है।

वहीं, SIR की आधिकारिक प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची को अपडेट करने, दावे-आपत्तियों की जांच करने और अंतिम सूची तैयार करने का काम चुनाव आयोग के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार किया जा रहा है। आयोग के पोर्टल पर मतदाता अपनी सूची और SIR से संबंधित जानकारी भी देख सकते हैं।

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