सोशल संवाद / रांची : झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के आधार पर सेवा से हटाए गए पारा शिक्षकों (सहायक अध्यापकों) के पक्ष में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने विभिन्न जिलों की याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए इन शिक्षकों की सेवा को यथावत जारी रखने और अगस्त 2024 से कार्य अवधि का बकाया मानदेय भुगतान करने का कड़ा निर्देश दिया है। साथ ही, सेवा समाप्ति से जुड़े पूर्व के सभी आदेशों को पूरी तरह रद्द कर दिया गया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति 2003 से 2006 के बीच हुई थी और उस समय निर्धारित न्यूनतम योग्यता (मैट्रिक) उनके पास थी।
एनसीटीई के मानकों के तहत इंटरमीडिएट योग्यता प्राप्त करने के क्रम में उन्होंने ‘हिंदी साहित्य सम्मेलन, इलाहाबाद’ का प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया था। पूर्व में 2012 की खंडपीठ ने इसे
वैध माना था। कोर्ट ने कहा कि ‘हिंदी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग’ और ‘इलाहाबाद’ के प्रमाण पत्र अलग हैं। अतः नियमों की अनदेखी कर बिना प्रक्रिया अपनाए अचानक मानदेय रोकना और सेवा समाप्त करना अनुचित है। अदालत ने पूरी प्रक्रिया आठ सप्ताह में पूरी करने का आदेश दिया है।











