सोशल संवाद / नई दिल्ली: कथित वोट चोरी और मतदाता सूची में गड़बड़ियों के मुद्दे पर INDIA गठबंधन के वरिष्ठ नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। विपक्षी प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर तत्काल रोक लगाने और चुनाव बैलेट पेपर से कराने समेत कई मांगें रखीं। गठबंधन ने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की जरूरत है।
यह भी पढे : CJP Protest: दिल्ली में 26 हजार CAPF जवानों की तैनाती, 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले सुरक्षा सख्त
ज्ञापन में चुनाव आयुक्तों को कानूनी कार्रवाई से छूट देने वाले कानून को निरस्त करने और कथित तौर पर वोट चोरी के निर्णायक सबूत वाले पिछले दो वर्षों के विधानसभा चुनाव रद्द करने की भी मांग की गई। ये सभी विपक्षी गठबंधन की मांगें और आरोप हैं।
बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग
विपक्षी नेताओं ने ज्ञापन में मांग की कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें और चुनाव आयुक्तों को कानूनी कार्रवाई से छूट देने वाले प्रावधानों को समाप्त किया जाए। इसके साथ ही SIR प्रक्रिया को तत्काल रोकने और मतदाता सूची से कथित तौर पर हटाए गए 13.30 करोड़ मतदाताओं को दोबारा शामिल करने की मांग उठाई गई।
गठबंधन ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को हटाकर बैलेट पेपर के जरिए चुनाव कराने की मांग भी की। इसके अलावा, जिन विधानसभा चुनावों में वोट चोरी के निर्णायक सबूत होने का दावा किया गया है, उन्हें रद्द करने की अपील की गई।
खरगे का आरोप- लोकतंत्र को कमजोर कर रही सरकार
राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने वोट चोरी का मुद्दा राष्ट्रपति के सामने रखा है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त पर कथित अनियमितताओं में शामिल होने का आरोप लगाया।
खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया। उनके मुताबिक, राष्ट्रपति ने विपक्षी नेताओं की बात सुनी और ज्ञापन पर उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया। खरगे ने कहा कि राष्ट्रपति ने वोट चोरी के आरोपों के समर्थन में सबूत मांगे हैं, जिन्हें गठबंधन सौंपेगा।
राहुल गांधी बोले- राष्ट्रपति ने आरोपों को खारिज नहीं किया
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति के समक्ष चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि राष्ट्रपति ने वोट चोरी के आरोपों को सीधे खारिज नहीं किया, बल्कि उनसे सबूत देने को कहा।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि कई राज्यों में चुनावी अनियमितताएं हुई हैं और 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि INDIA गठबंधन अपने आरोपों से जुड़े सबूत राष्ट्रपति को देने के लिए तैयार है।
प्रतिनिधिमंडल में कई विपक्षी दलों के नेता शामिल
राष्ट्रपति से मिलने वाले प्रतिनिधिमंडल में मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी, तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी, समाजवादी पार्टी के नेता राजीव राय, एनसीपी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले, राजद नेता मनोज झा, सीपीएम नेता एमए बेबी, सीपीआई नेता डी. राजा, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और वीसीके नेता थोल. थिरुमावलवन सहित कई नेता शामिल थे।
इससे पहले विपक्षी नेताओं और सांसदों ने संसद के सेंट्रल हॉल में बैठक की। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन की ओर पैदल मार्च किया। इस दौरान विजय चौक पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी, केसी वेणुगोपाल, कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू समेत कई नेताओं ने धरना दिया और नारेबाजी की।
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी
INDIA गठबंधन ने घोषणा की कि उसका प्रतिनिधिमंडल सोमवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश को ज्ञापन सौंपने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएगा। विपक्षी नेताओं ने ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 326 का उल्लेख करते हुए कहा कि मतदान का अधिकार प्रतिनिधि लोकतंत्र की बुनियाद है।
ज्ञापन में चुनाव आयोग को इस अधिकार का संवैधानिक संरक्षक बताते हुए कहा गया कि आयोग संविधान के प्रति जवाबदेह है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में मनमाने बदलाव, फैसलों के लिए जवाबदेही से बचने और सवाल उठाने वालों की आवाज दबाने की अनुमति किसी संस्था को नहीं दी जा सकती।
चुनाव आयोग की जवाबदेही पर उठाए सवाल
विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर कथित वोट चोरी से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट के सामने गलतबयानी करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने राष्ट्रपति से संवैधानिक भूमिका निभाते हुए मतदान के अधिकार की रक्षा सुनिश्चित करने और ज्ञापन में उठाई गई मांगों पर कार्रवाई करने की अपील की।
हालांकि, ज्ञापन में लगाए गए आरोपों और मांगों पर अंतिम निर्णय संबंधित संवैधानिक संस्थाओं और न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगा।











