सोशल संवाद / चक्रधरपुर: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं दिशोम गुरु स्वर्गीय शिबू सोरेन की पत्नी और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माता रूपी सोरेन के निधन पर चक्रधरपुर के विधायक सुखराम उरांव ने गहरी शोक संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने रूपी सोरेन के जीवन को त्याग, धैर्य, समर्पण और संघर्ष की मिसाल बताते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
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रूपी सोरेन का निधन 7 अक्टूबर 2026 को हुआ था। 8 अक्टूबर को उनके पैतृक गांव नेमरा में अंतिम संस्कार संपन्न हुआ। उनके निधन से राजनीतिक, सामाजिक और जनजातीय क्षेत्रों में शोक का माहौल है।
झारखंड आंदोलन के कठिन दौर में निभाई अहम भूमिका
विधायक सुखराम उरांव ने कहा कि झारखंड को अलग राज्य का दर्जा दिलाने और महाजनी प्रथा के खिलाफ चले लंबे संघर्ष के दौरान दिशोम गुरु शिबू सोरेन लगातार जनाधिकारों, आदिवासी अस्मिता और अलग राज्य की मांग को लेकर सक्रिय रहे। इस कठिन दौर में रूपी सोरेन ने परिवार की जिम्मेदारियां संभालते हुए विपरीत परिस्थितियों का सामना किया और अपने परिवार को मजबूती प्रदान की।
उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान रूपी सोरेन का धैर्य, त्याग और समर्पण परिवार के लिए बड़ा संबल रहा। उनका योगदान केवल पारिवारिक जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं था, बल्कि झारखंड आंदोलन के इतिहास का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है।
भगवान श्रीकृष्ण के सारथी रूप से की तुलना
सुखराम उरांव ने रूपी सोरेन के योगदान की तुलना महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण की सारथी की भूमिका से की। उन्होंने कहा कि जिस तरह श्रीकृष्ण ने अर्जुन को मार्गदर्शन और संबल दिया, उसी तरह रूपी सोरेन ने संघर्ष के दौर में अपने परिवार को संभालने और मजबूती से खड़े रहने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि झारखंड आंदोलन का इतिहास केवल सड़कों पर संघर्ष करने वाले लोगों की कहानी नहीं है, बल्कि उन परिवारों के त्याग और समर्पण की गाथा भी है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में आंदोलनकारियों का साथ दिया। रूपी सोरेन का जीवन इसी त्याग और समर्पण का उदाहरण रहा।
शोक में बनमालीपुर का जनजातीय महोत्सव स्थगित
रूपी सोरेन के निधन के बाद शोक व्यक्त करते हुए चक्रधरपुर विधायक सुखराम उरांव के गांव बनमालीपुर में आयोजित होने वाला तीन दिवसीय जनजातीय महोत्सव स्थगित कर दिया गया है।
दुर्गा पूजा के अवसर पर बनमालीपुर में प्रत्येक वर्ष इस महोत्सव का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष भी कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार कर ली गई थी और तैयारियां पूरी हो चुकी थीं। लेकिन रूपी सोरेन के निधन से उत्पन्न शोक की स्थिति को देखते हुए लट्टू उरांव कल्याण समिति और ग्रामीणों ने इस वर्ष महोत्सव स्थगित करने का निर्णय लिया।
समिति और ग्रामीणों का यह फैसला दिवंगत रूपी सोरेन के प्रति सम्मान और संवेदना को दर्शाता है। आयोजन से जुड़े लोगों ने उत्सव के बजाय शोक और श्रद्धांजलि को प्राथमिकता दी।
सुखराम उरांव ने व्यक्त की संवेदना
विधायक सुखराम उरांव ने शोकाकुल परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि रूपी सोरेन का जीवन त्याग, धैर्य और पारिवारिक जिम्मेदारियों के प्रति समर्पण का प्रतीक रहा। झारखंड आंदोलन के कठिन दौर में परिवार को संभालने में उनकी भूमिका सदैव स्मरणीय रहेगी।
उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में दुख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की कामना की।











