सोशल संवाद/डेस्क : झारखंड में महिला शिक्षा को लेकर सामने आए आंकड़े राज्य के विकास और शिक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करते हैं। एक ओर शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में महिलाएं ऐसी हैं, जिन्हें कभी स्कूल जाने का अवसर ही नहीं मिला। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) के आंकड़ों के अनुसार, झारखंड में 6 वर्ष या उससे अधिक उम्र की करीब 32 प्रतिशत महिलाएं कभी स्कूल नहीं गई हैं। यह स्थिति महिला शिक्षा के क्षेत्र में मौजूद चुनौतियों को उजागर करती है।
यह भी पढ़े: TCS Employees Bonus: TCS के सीनियर कर्मचारियों को बड़ा झटका, इस तिमाही नहीं मिलेगा वेरिएबल पे
राज्य में महिला शिक्षा का स्तर राष्ट्रीय औसत से भी नीचे है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच शिक्षा की पहुंच में बड़ा अंतर देखने को मिलता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर झारखंड की ग्रामीण महिलाएं शिक्षा के मामले में पीछे क्यों हैं और इस अंतर को कम करने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए?
झारखंड में महिला शिक्षा राष्ट्रीय औसत से पीछे
दिए गए NFHS-6 के आंकड़ों के मुताबिक, झारखंड में 6 वर्ष या उससे अधिक उम्र की 68 प्रतिशत महिलाएं ही कभी स्कूल गई हैं। इसके मुकाबले राष्ट्रीय औसत 73.7 प्रतिशत बताया गया है। इस तरह झारखंड राष्ट्रीय औसत से 5.7 प्रतिशत अंक पीछे है।
इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि राज्य में महिला शिक्षा की पहुंच बढ़ाने के लिए अभी और प्रयासों की जरूरत है। शिक्षा तक सीमित पहुंच का असर महिलाओं के रोजगार, आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक भागीदारी जैसे क्षेत्रों पर भी पड़ सकता है।
पिछले सर्वेक्षण के मुकाबले हुआ सुधार
महिला शिक्षा के मामले में झारखंड में कुछ सुधार भी दर्ज किया गया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, NFHS-5 के वर्ष 2019-21 के सर्वेक्षण में राज्य की 64.5 प्रतिशत महिलाएं कभी स्कूल गई थीं। यह आंकड़ा बढ़कर अब 68 प्रतिशत बताया गया है। इस तरह पिछले सर्वेक्षण के मुकाबले 3.5 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, यह सुधार महत्वपूर्ण है, लेकिन राज्य को राष्ट्रीय औसत तक पहुंचने के लिए अभी लंबा रास्ता तय करना होगा।
ग्रामीण और शहरी महिलाओं के बीच 18.2 प्रतिशत अंक का अंतर
झारखंड में महिला शिक्षा की सबसे बड़ी चुनौतियों में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच का अंतर शामिल है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, शहरी क्षेत्रों में 82.4 प्रतिशत महिलाएं कभी स्कूल गई हैं, जबकि ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़ा केवल 64.2 प्रतिशत है।
यानी ग्रामीण और शहरी महिलाओं के बीच 18.2 प्रतिशत अंक का अंतर है। यह अंतर बताता है कि शिक्षा की पहुंच सभी क्षेत्रों में समान नहीं है।
ग्रामीण इलाकों में स्कूलों की दूरी, परिवहन की समस्या, आर्थिक कठिनाइयां, घरेलू जिम्मेदारियां और सामाजिक परिस्थितियां लड़कियों की पढ़ाई को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, इन कारणों का वास्तविक योगदान समझने के लिए क्षेत्रवार और विस्तृत अध्ययन की जरूरत है।
केरल सबसे आगे, बिहार झारखंड से नीचे
महिला शिक्षा के उपलब्ध आंकड़ों में राज्यों के बीच भी बड़ा अंतर दिखाई देता है। दिए गए आंकड़ों के अनुसार, केरल 96.6 प्रतिशत के साथ सबसे आगे है। हिमाचल प्रदेश में यह आंकड़ा 83.3 प्रतिशत और हरियाणा में 76.1 प्रतिशत बताया गया है।
वहीं, बिहार में 64.1 प्रतिशत महिलाएं ही कभी स्कूल गई हैं। झारखंड की स्थिति बिहार से बेहतर होने के बावजूद राष्ट्रीय औसत से नीचे है। राज्यों के बीच यह अंतर शिक्षा के अवसरों, स्कूलों तक पहुंच और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों की भूमिका पर ध्यान देने की जरूरत को रेखांकित करता है।
महिला शिक्षा राज्य के विकास के लिए क्यों जरूरी?
महिला शिक्षा केवल स्कूल जाने या पढ़ना-लिखना सीखने तक सीमित नहीं है। इसका संबंध महिलाओं के स्वास्थ्य, रोजगार, आर्थिक स्वतंत्रता और परिवार के सामाजिक विकास से भी जुड़ा है। शिक्षित महिलाएं अपने अधिकारों, सरकारी योजनाओं और उपलब्ध अवसरों के बारे में बेहतर जानकारी हासिल कर सकती हैं। शिक्षा उन्हें रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों तक पहुंचने में भी मदद कर सकती है।
महिलाओं की शिक्षा में सुधार होने से अगली पीढ़ी की पढ़ाई को प्रोत्साहन मिल सकता है। इसलिए महिला शिक्षा को मजबूत करना राज्य के समावेशी विकास के लिए भी महत्वपूर्ण है।
झारखंड में महिला शिक्षा सुधारने के लिए किन कदमों की जरूरत?
राज्य में महिला शिक्षा की स्थिति बेहतर बनाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इसके लिए स्कूलों तक सुरक्षित पहुंच, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की सहायता और पढ़ाई बीच में छोड़ने वाली लड़कियों को दोबारा शिक्षा से जोड़ने जैसे कदम उपयोगी हो सकते हैं।
इसके साथ ही, वयस्क महिलाओं के लिए साक्षरता कार्यक्रमों को मजबूत करना, स्थानीय स्तर पर जागरूकता बढ़ाना और सरकारी योजनाओं की पहुंच का नियमित मूल्यांकन करना भी महत्वपूर्ण है।
यह भी जरूरी है कि शिक्षा से जुड़ी योजनाओं का लाभ वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचे। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के आंकड़ों की नियमित समीक्षा करके उन इलाकों की पहचान की जा सकती है, जहां विशेष प्रयासों की जरूरत है।











