सोशल संवाद/डेस्क: दिल्ली में CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 11 अक्टूबर 2026 को विशेष सुनवाई की। अदालत ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया के बिना हिरासत में नहीं लेने, मेट्रो और रेलवे सेवाएं सामान्य रखने तथा अनावश्यक बैरिकेडिंग हटाने सहित कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। कोर्ट ने इंटरनेट सेवाएं बाधित नहीं करने और वकीलों, पत्रकारों समेत अन्य पेशेवरों को अपना काम करने देने पर भी जोर दिया।
यह भी पढे : CJP Protest: दिल्ली प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, मेट्रो-इंटरनेट बहाल करने और बैरिकेड्स हटाने के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने क्या-क्या निर्देश दिए?
1. शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को अवैध हिरासत में न लें
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण और निहत्थे तरीके से एकत्र हुए लोगों को कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना हिरासत में नहीं लिया जा सकता। अदालत ने प्रदर्शन के दौरान बड़े पैमाने पर लोगों को हिरासत में लेने से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया।
2. मेट्रो और रेलवे सेवाएं सामान्य रहें
अदालत ने दिल्ली मेट्रो को सामान्य समय-सारिणी के अनुसार चलाने और रेलवे सहित सार्वजनिक परिवहन सेवाओं को सुचारू बनाए रखने का निर्देश दिया। प्रदर्शन के दौरान परिवहन सेवाओं पर प्रतिबंध लगाने को लेकर याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाए थे।
3. अनावश्यक बैरिकेड्स हटाने का निर्देश
कोर्ट ने प्रशासन से कहा कि कानून-व्यवस्था की स्थिति में जहां अत्यंत आवश्यक हो, वहीं बैरिकेडिंग की जाए। बाकी जगहों पर बैरिकेड्स की जरूरत की समीक्षा कर उन्हें हटाया जाए, ताकि आम लोगों की आवाजाही प्रभावित न हो।
4. इंटरनेट सेवाएं बाधित नहीं हों
सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेट सेवाएं सामान्य बनाए रखने पर जोर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि कानून के अनुसार आवश्यक स्थिति के अलावा इंटरनेट कनेक्टिविटी को बाधित नहीं किया जाना चाहिए।
5. वकीलों और पत्रकारों को काम करने दिया जाए
अदालत ने कहा कि वकीलों, पत्रकारों और अन्य पेशेवरों को अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने से नहीं रोका जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट और अन्य अदालतों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबंधात्मक आदेशों से संबंधित नोटिस हटाने के निर्देश भी दिए गए।
6. केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और DMRC को नोटिस
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय गृह सचिव, दिल्ली पुलिस कमिश्नर और दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के अध्यक्ष को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। मामला 9 अक्टूबर के आदेश के कथित उल्लंघन और 10 अक्टूबर को प्रदर्शन से पहले की गई पुलिस कार्रवाई से जुड़ा था।
केंद्र सरकार ने क्या कहा?
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने प्रशासन का पक्ष रखा। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने बताया कि 10 अक्टूबर को दिल्ली मेट्रो के कुल 303 स्टेशनों में से 45 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास प्रतिबंधित किए गए थे।
दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को निर्धारित स्थल तक पहुंचने से रोका गया और पुलिस कार्रवाई के कारण आम नागरिकों को भी परेशानी हुई। इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा गया है।
क्या है पूरा मामला?
दिल्ली में CJP और अन्य संगठनों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन का आह्वान किया था। प्रदर्शन से पहले राजधानी के कई इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई थी। पुलिस कार्रवाई, हिरासत और सार्वजनिक परिवहन पर प्रतिबंधों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गईं।
अदालत के निर्देशों का उद्देश्य शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखना तथा आम लोगों की आवाजाही सुनिश्चित करना है। हालांकि, संबंधित अधिकारियों के जवाब और आगे की न्यायिक सुनवाई से मामले की अगली स्थिति स्पष्ट होगी।











