Chia Seeds Farming: किसानों के लिए कम लागत में कमाई का नया विकल्प, जानें खेती का सही तरीका

By Riya Kumari

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Chia Seeds Farming: किसानों के लिए कम लागत में कमाई का नया विकल्प, जानें खेती का सही तरीका

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सोशल संवाद / डेस्क : खेती में कम पानी और कम लागत के साथ बेहतर कमाई का विकल्प तलाश रहे किसानों के लिए चिया सीड्स की खेती एक नई संभावना बनकर उभर रही है। चिया के बीज पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं और इनका इस्तेमाल हेल्थ फूड, पेय पदार्थों और कई खाद्य उत्पादों में किया जाता है। बाजार में इसकी मांग के कारण किसान इस फसल की ओर आकर्षित हो रहे हैं। हालांकि, खेती शुरू करने से पहले स्थानीय जलवायु, उत्पादन लागत और बाजार में खरीदार की उपलब्धता की जानकारी लेना जरूरी है।

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चिया सीड्स की खेती क्यों है खास?

चिया एक कम अवधि में तैयार होने वाली फसल है। इसकी फसल आमतौर पर 90 से 120 दिनों में कटाई के लिए तैयार हो सकती है। कृषि अनुसंधान के अनुसार, उचित परिस्थितियों में इसकी खेती कम पानी की उपलब्धता वाले क्षेत्रों में भी की जा सकती है। हालांकि, बेहतर अंकुरण और उत्पादन के लिए खेत में पर्याप्त नमी और जल निकासी का होना जरूरी है।

कब करें चिया की बुवाई?

चिया की बुवाई का समय स्थानीय मौसम और क्षेत्र पर निर्भर करता है। ICAR के राष्ट्रीय अजैविक तनाव प्रबंधन संस्थान (NIASM), बारामती के अनुसार, कई परिस्थितियों में बेहतर उत्पादन के लिए 1 अगस्त से 15 सितंबर तक का समय उपयुक्त पाया गया है। वहीं, महाराष्ट्र के वाशिम जिले की कृषि संबंधी जानकारी में रबी सीजन के दौरान 1 अक्टूबर से 15 दिसंबर तक बुवाई का समय बताया गया है। इसलिए किसानों को अपने क्षेत्र के कृषि विशेषज्ञ से सलाह लेकर ही बुवाई करनी चाहिए।

कैसी मिट्टी में होती है खेती?

चिया की खेती अच्छी जल निकासी वाली रेतीली, हल्की से मध्यम और कुछ क्षेत्रों में कम उपजाऊ मिट्टी में भी की जा सकती है। खेत में पानी जमा होने से फसल प्रभावित हो सकती है। बुवाई से पहले खेत की तैयारी, बीज की गुणवत्ता और पौधों के बीच उचित दूरी पर ध्यान देना जरूरी है।

कितना बीज और पानी चाहिए?

ICAR-NIASM की सिफारिश के अनुसार, कतार में बुवाई करने पर प्रति हेक्टेयर लगभग 2 किलोग्राम बीज की जरूरत होती है। छिटकवां विधि से बुवाई करने पर बीज की मात्रा लगभग 2.5 से 3 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर हो सकती है। पानी की जरूरत मौसम, मिट्टी और फसल की अवस्था पर निर्भर करती है। कम पानी की जरूरत होने का मतलब यह नहीं है कि फसल को नमी की आवश्यकता नहीं होती।

कितनी हो सकती है कमाई?

चिया की खेती से होने वाली कमाई का निर्धारण उत्पादन, बीज की गुणवत्ता, खेती की लागत और बिक्री मूल्य से होता है। ICAR-NIASM के शोध में चिया की अकेले खेती से लगभग ₹75,213 प्रति हेक्टेयर शुद्ध आय दर्ज की गई। चिया के साथ मेथी की अंतरफसल प्रणाली में पूर्ण सिंचाई की स्थिति में लगभग ₹1.07 लाख प्रति हेक्टेयर शुद्ध आय दर्ज की गई। ये शोध-आधारित आंकड़े हैं; किसानों की वास्तविक कमाई अलग हो सकती है।

खेती से पहले बाजार की जानकारी जरूर लें

चिया की खेती शुरू करने से पहले किसानों को बीज की विश्वसनीयता, स्थानीय खरीदारों और बिक्री मूल्य की जानकारी जुटानी चाहिए। फसल की मांग और कीमत क्षेत्र के अनुसार बदल सकती है। इसलिए केवल अधिक मुनाफे के दावों के आधार पर बड़े क्षेत्र में बुवाई करने के बजाय पहले कृषि विशेषज्ञ से सलाह लें और संभावित खरीदारों से संपर्क सुनिश्चित करें।

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