Railway Compensation: ट्रेन के टॉयलेट में नहीं था पानी, रेलवे देगा ₹16,000; जानें पूरा मामला

By Riya Kumari

Published :

Follow
Railway Compensation: ट्रेन के टॉयलेट में नहीं था पानी, रेलवे देगा ₹16,000; जानें पूरा मामला

Join WhatsApp

Join Now

सोशल संवाद / डेस्क : ट्रेन में सफर के दौरान शौचालय में पानी नहीं मिलने के मामले में कर्नाटक के शिवमोग्गा जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने दक्षिण पश्चिम रेलवे को यात्री को कुल 16,000 रुपये देने का आदेश दिया है। आयोग ने इसे सेवा में कमी मानते हुए मूल टिकट का किराया लौटाने, मानसिक परेशानी के लिए मुआवजा देने और मुकदमे का खर्च चुकाने का निर्देश दिया।

यह भी पढ़े : Jharkhand Weather Alert: चक्रवात ‘अर्णब’ का झारखंड में असर, कई जिलों में बारिश और वज्रपात का अलर्ट

Sunrise Enclave
Hospital Advertisement

24 लोगों के साथ यात्रा कर रहा था परिवार

मामला अप्रैल 2025 का है। शिवमोग्गा निवासी टी. नागेंद्र अपनी पत्नी, बच्चों और रिश्तेदारों सहित कुल 24 लोगों के साथ यात्रा कर रहे थे। यशवंतपुर रेलवे स्टेशन से शिवमोग्गा जाने के दौरान परिवार ने आरोप लगाया कि उनके कोच के शौचालयों में पानी नहीं था।

शिकायत के मुताबिक, यात्रियों ने ट्रेन में मौजूद रेलवे पुलिसकर्मियों से मदद मांगी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसके बाद परिवार को तुमकुरु स्टेशन पर उतरना पड़ा। नागेंद्र ने वहां स्टेशन मास्टर के पास लिखित शिकायत दर्ज कराई। आगे की यात्रा जारी रखने के लिए परिवार ने दूसरी ट्रेन के टिकट खरीदने पर 1,760 रुपये अतिरिक्त खर्च किए।

रेलवे ने आरोपों से किया था इनकार

यात्री ने बाद में रेलवे अधिकारियों को कानूनी नोटिस भेजा। जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया।

सुनवाई के दौरान रेलवे अधिकारियों ने शौचालय में पानी नहीं होने के आरोपों से इनकार किया। हालांकि, आयोग ने यात्री के टिकट, स्टेशन मास्टर के पास दर्ज शिकायत और अन्य दस्तावेजों की जांच की। आयोग के अनुसार, रेलवे यह साबित नहीं कर पाया कि संबंधित कोच में पानी की कोई समस्या नहीं थी। इसके बाद आयोग ने सेवा में कमी के लिए रेलवे अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया।

रेलवे को कितना भुगतान करना होगा?

आयोग ने यात्री के पक्ष में निम्नलिखित आदेश दिए हैं:

  • ₹1,000: मूल टिकट का किराया वापस करना होगा।
  • ₹10,000: असुविधा और मानसिक परेशानी के लिए मुआवजा।
  • ₹5,000: मुकदमे के खर्च के रूप में भुगतान।

इस तरह रेलवे को कुल 16,000 रुपये देने होंगे। मूल टिकट के 1,000 रुपये के रिफंड पर 15 अप्रैल 2025 से 6 प्रतिशत सालाना ब्याज का भी निर्देश दिया गया है। आयोग ने भुगतान के लिए 45 दिन का समय दिया है। आदेश का पालन नहीं होने पर निर्धारित शर्तों के अनुसार ब्याज दर बढ़ सकती है।

यात्रियों की शिकायतों पर कार्रवाई जरूरी

इस मामले में आयोग ने यात्रियों की बुनियादी सुविधाओं और शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई करने की रेलवे की जिम्मेदारी को रेखांकित किया। ट्रेन में पानी, साफ-सफाई और शौचालय जैसी सुविधाएं लंबी दूरी की यात्रा के दौरान बेहद महत्वपूर्ण होती हैं।

रेलवे यात्रा के दौरान ऐसी समस्या होने पर यात्री संबंधित रेलवे अधिकारियों के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं। उपभोक्ता संबंधी सहायता के लिए राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1915 पर भी संपर्क किया जा सकता है।

YouTube Join Now
Facebook Join Now
Social Samvad MagazineJoin Now
---Advertisement---

संबंधित पोस्ट