सोशल संवाद / जमशेदपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के अवसर पर रविवार, 1 नवंबर 2026 को जमशेदपुर महानगर की ओर से बिष्टुपुर स्थित गोपाल मैदान में भव्य शाखा संगम का आयोजन किया गया। इसमें जमशेदपुर महानगर की 213 शाखाओं के स्वयंसेवक एक स्थान पर एकत्रित हुए। कार्यक्रम के दौरान स्वयंसेवकों ने सामूहिक सहभागिता, अनुशासन और संगठनात्मक गतिविधियों का प्रदर्शन किया।
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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक डॉ. गौतम सूत्रधर उपस्थित रहे। वहीं मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उत्तर-पूर्व क्षेत्र (बिहार-झारखंड) के बौद्धिक प्रमुख राणा प्रताप ने संबोधित किया।
‘शाखा व्यक्ति निर्माण की कार्यशाला है’
मुख्य अतिथि डॉ. गौतम सूत्रधर ने अपने संबोधन में राष्ट्र निर्माण और समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में संघ के योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शाखा संघ का प्राण है और यह व्यक्ति निर्माण की कार्यशाला के रूप में काम करती है।
उन्होंने बताया कि नियमित शाखा के माध्यम से व्यक्ति में अनुशासन, आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, सकारात्मक सोच और सामाजिक दायित्वबोध जैसे गुण विकसित होते हैं। उनके अनुसार, व्यक्ति के जीवन में आने वाले सकारात्मक बदलाव समाज और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
संघ की स्थापना के उद्देश्य पर हुई चर्चा
मुख्य वक्ता राणा प्रताप ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की पृष्ठभूमि और उस समय देश एवं समाज के सामने मौजूद चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संगठित, अनुशासित और राष्ट्रभाव से युक्त समाज के निर्माण की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए संघ की स्थापना हुई थी।
उन्होंने शाखा को केवल शारीरिक गतिविधियों या नियमित मिलन का केंद्र नहीं, बल्कि व्यक्ति निर्माण की प्रयोगशाला बताया। उनके अनुसार, शाखा के माध्यम से स्वयंसेवकों में समयबद्धता, नेतृत्व क्षमता, सामूहिकता, आत्मविश्वास, सामाजिक समरसता और राष्ट्र के प्रति समर्पण की भावना विकसित होती है।
पंच परिवर्तन की अवधारणा पर दिया जोर
अपने संबोधन में राणा प्रताप ने संघ की ओर से प्रस्तावित पंच परिवर्तन की अवधारणा को भी प्रमुखता से रखा। इसके तहत पांच विषयों को समाज परिवर्तन का आधार बताया गया:
- सामाजिक समरसता – समाज में आपसी सद्भाव और समानता को बढ़ावा देना।
- कुटुंब प्रबोधन – परिवार में संस्कार और संवाद को मजबूत करना।
- पर्यावरण संरक्षण – प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा के लिए प्रयास करना।
- स्वदेशी का आचरण – स्वदेशी उत्पादों और जीवनशैली को प्रोत्साहित करना।
- नागरिक कर्तव्य – नागरिकों को अपने सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्वों के प्रति जागरूक करना।
उन्होंने इन विषयों को केवल विचारों तक सीमित न रखकर दैनिक जीवन में अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।
213 शाखाओं के स्वयंसेवकों का एकत्रीकरण
शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित इस शाखा संगम में जमशेदपुर महानगर की 213 शाखाओं के स्वयंसेवकों की सहभागिता रही। आयोजन के माध्यम से शाखा गतिविधियों और संगठनात्मक एकजुटता को प्रदर्शित किया गया।
कार्यक्रम का समापन संघ की प्रार्थना के साथ हुआ। इस अवसर पर स्वयंसेवकों ने संघ के आदर्शों, राष्ट्रभाव और समाज के प्रति समर्पण के संकल्प को दोहराया।











