Parenting Tips: कहीं आपका बच्चा स्कूल में बुलिंग का शिकार तो नहीं? इन 7 संकेतों से पहचानें

By Tamishree Mukherjee

Published :

Follow
School Bullying, Parenting Tips

Join WhatsApp

Join Now

सोशल संवाद / डेस्क : स्कूल किसी भी बच्चे के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। यहां बच्चे सिर्फ किताबी ज्ञान ही नहीं सीखते, बल्कि दोस्त बनाना, सामाजिक व्यवहार करना, अपनी बात रखना और मुश्किल परिस्थितियों का सामना करना भी सीखते हैं। स्कूल का माहौल बच्चे के मानसिक और भावनात्मक विकास में अहम भूमिका निभाता है। लेकिन अगर इसी जगह उसे बार-बार मजाक, ताने, धमकी या मारपीट का सामना करना पड़े, तो स्कूल उसके लिए डर और तनाव की वजह बन सकता है।

यह भी पढ़े : Cyber Fraud Alert: फेस्टिव सीजन में फर्जी शॉपिंग विज्ञापनों से रहें सावधान, CyberDost ने दी चेतावनी; एक क्लिक में खाली हो सकता है बैंक अकाउंट

Sunrise Enclave

ऐसी स्थिति को बुलिंग (Bullying) कहा जाता है। कई बार बच्चे बुलिंग का शिकार होने के बावजूद अपने माता-पिता को इसकी जानकारी नहीं देते। उन्हें डर रहता है कि शिकायत करने पर दूसरे बच्चे उन्हें और परेशान कर सकते हैं या कोई उनकी बात पर विश्वास नहीं करेगा। यही वजह है कि माता-पिता के लिए बच्चे के व्यवहार और उसकी दिनचर्या में होने वाले बदलावों को समझना बेहद जरूरी है।

अगर आपका बच्चा अचानक स्कूल जाने से बचने लगा है, अकेले रहना पसंद करता है या उसके व्यवहार में बदलाव दिखाई दे रहा है, तो इसे सामान्य जिद समझकर नजरअंदाज न करें। आइए जानते हैं बच्चों में स्कूल बुलिंग के 7 प्रमुख संकेत और ऐसी स्थिति में माता-पिता को क्या करना चाहिए।

1. स्कूल जाने से बचने लगे या रोज नए बहाने बनाए

अगर आपका बच्चा पहले खुशी-खुशी स्कूल जाता था, लेकिन अब रोज सुबह स्कूल जाने से मना करने लगा है, तो इसकी वजह जानने की कोशिश करें। हो सकता है कि स्कूल में कोई बच्चा उसे परेशान कर रहा हो या वह किसी खास जगह जाने से डर रहा हो।

कुछ बच्चे स्कूल बस में बैठने, किसी विशेष क्लास में जाने या लंच ब्रेक के दौरान बाहर निकलने से बचने लगते हैं। वे कभी पेट दर्द तो कभी सिरदर्द का बहाना भी बना सकते हैं। अगर इस तरह की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, तो बच्चे से प्यार से बात करें। बिना डांटे यह समझने की कोशिश करें कि आखिर उसे स्कूल जाने में परेशानी क्यों हो रही है।

2. शरीर पर चोट के निशान या स्कूल का सामान गायब मिलना

बच्चे के शरीर पर बार-बार चोट, खरोंच या नीले निशान दिखाई देना भी बुलिंग का संकेत हो सकता है। इसी तरह स्कूल से लौटने पर किताबें फटी हुई मिलें, पेंसिल बॉक्स गायब हो, पानी की बोतल टूट जाए या कपड़े खराब हों, तो इस पर ध्यान देना जरूरी है।

हालांकि, हर चोट या सामान के खराब होने का मतलब बुलिंग नहीं होता। लेकिन अगर ऐसी घटनाएं बार-बार हो रही हैं और बच्चा उनके बारे में स्पष्ट जवाब नहीं दे पा रहा है, तो उससे शांत माहौल में बात करें। जरूरत पड़ने पर स्कूल से भी जानकारी लें।

3. अचानक चुप रहने लगे या व्यवहार में बदलाव आ जाए

बुलिंग का असर बच्चे के व्यवहार पर भी पड़ सकता है। जो बच्चा पहले घर आकर स्कूल की बातें बताता था, दोस्तों के साथ खेलता था और परिवार के साथ समय बिताना पसंद करता था, वह अचानक अकेले रहने लग सकता है।

कुछ बच्चे छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करने लगते हैं, जबकि कुछ चुप और उदास रहने लगते हैं। कई बार बच्चा अपनी परेशानी शब्दों में व्यक्त नहीं कर पाता। ऐसे में माता-पिता को उसके व्यवहार में आने वाले बदलावों पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

4. पढ़ाई और स्कूल के प्रदर्शन में गिरावट आने लगे

अगर बच्चे के नंबर अचानक कम होने लगे हैं, वह होमवर्क पूरा नहीं कर रहा है या क्लास में ध्यान नहीं दे पा रहा है, तो इसकी वजह सिर्फ पढ़ाई में रुचि कम होना नहीं हो सकती। बुलिंग का सामना करने वाला बच्चा स्कूल में असुरक्षित महसूस कर सकता है। उसका ध्यान पढ़ाई के बजाय इस चिंता में लगा रह सकता है कि लंच ब्रेक में कौन उसे परेशान करेगा या क्लास में उसका मजाक तो नहीं उड़ाया जाएगा।

इसलिए बच्चे की पढ़ाई में अचानक गिरावट आने पर उसे डांटने या दूसरे बच्चों से तुलना करने के बजाय उसकी परेशानी समझने की कोशिश करें।

5. नींद और खाने की आदतों में बदलाव आना

बच्चे का रात में ठीक से न सोना, बार-बार डरकर उठना, बुरे सपने देखना या सुबह उठने में परेशानी होना तनाव से जुड़ा संकेत हो सकता है। इसी तरह कुछ बच्चे पहले की तुलना में कम खाना खाने लगते हैं, जबकि कुछ तनाव के कारण जरूरत से ज्यादा खाने लगते हैं। अगर बच्चे की नींद और खाने की आदतों में लगातार बदलाव दिखाई दे रहा है, तो इसे हल्के में न लें।

ध्यान रखें कि इन लक्षणों की वजह बुलिंग के अलावा दूसरी शारीरिक या मानसिक परेशानियां भी हो सकती हैं। समस्या बनी रहने पर बाल रोग विशेषज्ञ या योग्य मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।

6. दोस्तों से दूरी बनाने लगे और अकेले रहना पसंद करे

बच्चे के दोस्त उसकी सामाजिक और भावनात्मक दुनिया का अहम हिस्सा होते हैं। अगर वह अचानक दोस्तों से मिलना बंद कर दे, जन्मदिन की पार्टियों में जाने से मना करे या स्कूल में किसी के साथ बैठने से डरने लगे, तो इसकी वजह जानना जरूरी है।

कई बार बुलिंग का शिकार बच्चा इस डर से दूसरे बच्चों से दूरी बना लेता है कि कहीं फिर उसका मजाक न उड़ाया जाए या उसे परेशान न किया जाए। माता-पिता को यह समझना चाहिए कि बच्चे का अकेले रहना हमेशा उसकी पसंद नहीं होता, बल्कि कभी-कभी यह उसकी परेशानी का संकेत भी हो सकता है।

7. मोबाइल इस्तेमाल करने के बाद परेशान या डरा हुआ दिखे

आज के समय में बुलिंग सिर्फ स्कूल की क्लास, खेल के मैदान या स्कूल बस तक सीमित नहीं है। सोशल मीडिया, मैसेजिंग ग्रुप और ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म पर भी बच्चों को परेशान किया जा सकता है। इसे साइबर बुलिंग (Cyber Bullying) कहा जाता है।

अगर बच्चा मोबाइल देखने के बाद अचानक उदास या गुस्से में आ जाता है, किसी मैसेज या नोटिफिकेशन से डरने लगता है या अपना फोन छिपाने लगता है, तो उससे बातचीत करें।

ऐसी स्थिति में बच्चे को दोष देने या उसका फोन तुरंत छीन लेने के बजाय उसका भरोसा जीतना जरूरी है। ऑनलाइन परेशान करने वाले मैसेज, स्क्रीनशॉट, प्रोफाइल और अन्य डिजिटल सबूत सुरक्षित रखें। बच्चे की ऑनलाइन सुरक्षा के लिए स्कूल और जरूरत पड़ने पर संबंधित अधिकारियों की मदद लें।

स्कूल में बुलिंग हो तो माता-पिता क्या करें?

अगर आपको लगता है कि आपका बच्चा स्कूल में बुलिंग का सामना कर रहा है, तो घबराने या तुरंत गुस्से में प्रतिक्रिया देने के बजाय समझदारी से कदम उठाएं।

1. बच्चे की बात ध्यान से सुनें

बच्चे से पूछें कि स्कूल में उसका दिन कैसा रहा और क्या किसी ने उसे परेशान किया। उसकी बात बीच में न काटें और न ही तुरंत सवालों की बौछार करें। उसे ऐसा माहौल दें, जिसमें वह बिना डर के अपनी परेशानी बता सके।

2. बच्चे को भरोसा दिलाएं कि उसकी गलती नहीं है

बच्चे को साफ शब्दों में बताएं कि किसी का उसे परेशान करना, धमकाना या मारना गलत है। इसमें उसकी कोई गलती नहीं है। उसे यह विश्वास दिलाएं कि आप उसकी मदद के लिए हमेशा मौजूद हैं।

3. स्कूल प्रशासन से संपर्क करें

क्लास टीचर, स्कूल काउंसलर या प्रिंसिपल को पूरी स्थिति की जानकारी दें। घटना कब हुई, कहां हुई और कौन-कौन मौजूद था, जैसी जानकारी साझा करें। जरूरत पड़ने पर लिखित शिकायत भी दें और स्कूल से बच्चे की सुरक्षा के लिए स्पष्ट कदम उठाने को कहें।

4. घटनाओं का रिकॉर्ड रखें

अगर बच्चे के साथ बार-बार बुलिंग हो रही है, तो हर घटना की तारीख, समय, जगह और उपलब्ध जानकारी लिखकर रखें। चोट के निशान की तस्वीरें और स्कूल से संबंधित संदेश सुरक्षित रखें। साइबर बुलिंग के मामले में स्क्रीनशॉट, लिंक और संबंधित अकाउंट की जानकारी भी संभालकर रखें।

5. बच्चे के साथ समय बिताएं

बच्चे के साथ नियमित रूप से समय बिताएं। उसके पसंदीदा खेलों और गतिविधियों में हिस्सा लें। उसे यह महसूस कराएं कि घर उसके लिए सुरक्षित जगह है और वह अपनी हर परेशानी आपसे साझा कर सकता है।

6. जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लें

अगर बच्चा लगातार डरा हुआ, उदास या तनाव में दिखाई दे रहा है, तो बाल मनोवैज्ञानिक या योग्य काउंसलर की मदद लेने में संकोच न करें। समय पर सहायता मिलने से बच्चे को अपनी भावनाएं समझने और मुश्किल परिस्थिति से निपटने में मदद मिल सकती है।

बच्चों को बुलिंग से बचाने के लिए माता-पिता क्या सिखाएं?

बच्चों को छोटी उम्र से ही अपनी बात स्पष्ट रूप से रखने, गलत व्यवहार को पहचानने और जरूरत पड़ने पर किसी भरोसेमंद बड़े व्यक्ति को बताने के लिए प्रोत्साहित करें। उन्हें समझाएं कि किसी को चिढ़ाना, अपमानित करना, धमकाना या मारना मजाक नहीं है।

इसके अलावा बच्चों को यह भी बताएं कि अगर वे किसी दूसरे बच्चे को बुलिंग का शिकार होते देखें, तो चुपचाप तमाशा देखने के बजाय किसी शिक्षक या जिम्मेदार व्यक्ति को इसकी जानकारी दें। ऑनलाइन दुनिया में अनजान लोगों से बातचीत, निजी जानकारी साझा करने और अपमानजनक संदेशों का जवाब देने को लेकर भी उन्हें जागरूक करें।

YouTube Join Now
Facebook Join Now
Social Samvad MagazineJoin Now
---Advertisement---