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तीन लोगों के डीएनए से तैयार हुआ बच्चा, ब्रिटेन में डॉक्टरों की नई सफलता

By Annu kumari

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सोशल संवाद/ डेस्क: ब्रिटेन के डॉक्टरों ने कुछ ऐसा शोध किया की उस पर किसी को विश्वास नहीं हो रहा। आज से दस साल पहले माइटोकॉन्ड्रियल दान को वैध बना दिया था। इस नियम के बनने के सालों बाद इसके नतीजे सामने आ रहे हैं। इस उच्च स्तरीय तकनीक के जरिए मानवीय डीएनए में आई खराबी को आगे बढ़ने से रोकना सबसे बड़ी चुनौती थी। अब डॉक्टरों ने इस शोध के नतीजे प्रकाशित किए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस तीन माता-पिता वाले शिशु की इस तकनीक से अभी तक आठ बच्चे पैदा किए जा चुके हैं, खुशी की बात यह है कि सभी अभी स्वस्थ हैं।

ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने इसे विकसित कर एक इतिहास रच दिया है। इसमें मां और पिता के एग और स्पर्म को एक डोनर महिला के एग के साथ मिलाया जाता है। यह तकनीक ब्रिटेन में पिछले एक दशक से कानूनी है।

न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रजनन उपचार पर प्रकाशित दो शोध पत्रों के मुताबिक सरकार से अनुमति मिलने के बाद इसका प्रयोग 22 महिलाओं के डीएनए के लिए किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक यह वह महिलाएं थी जिनका जीन परेशानी खड़ा करने वाला था। यानी इनके जीन को लेकर अगर बच्चा पैदा होता तो वह गंभीर अनुवांशिक विकार यार जन्मजात विकलांगता के साथ पैदा होता। इन महिलाओं के जीन में लेह सिंड्रोम भी उपस्थित था।

रिपोर्ट के मुताबिक न्यूकैसल टीम द्वारा विकसित की गई इस तकनीक में तीन लोगों के डीएनए का उपयोग करके एक भ्रूण का निर्माण किया गया है। इसमें होने वाले माता पिता के न्यूक्लियर डीएनए को लिया गया और डोनर एक से स्वस्थ माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए को लिया गया। जिससे इसे तैयार किया गया है।

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