सोशल संवाद/रांची : झारखंड में बिजली बिलिंग व्यवस्था को शत-प्रतिशत पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के लिए झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (जेबीवीएनएल) ने अब गलत बिजली बिल तैयार करने वालों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। निगम ने अभियंताओं की विशेष टीम गठित की है, जो राज्य के सभी बिजली सर्किलों में जाकर रैंडम आधार पर उपभोक्ताओं के बिजली बिल और मीटर की वास्तविक रीडिंग का मिलान करेगी। इस संबंध में झारखंड ऊर्जा विकास निगम के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक जेबीवीएनएल के श्रीनिवासन ने आदेश जारी किया है।

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जांच टीम यह भी देखेगी कि उपभोक्ताओं को नियमित रूप से हर महीने बिल जारी हो रहा है या नहीं। इसके साथ ही मीटर की वास्तविक स्थिति, मीटर की रीडिंग और बिल में दर्ज रीडिंग के बीच अंतर तथा मीटर स्मार्ट ब्रिड सिस्टम से जुड़ा है या नहीं, इसकी भी जांच की जाएगी। जांच में लापरवाही या जानबूझकर गलत बिलिंग का मामला सामने आने पर संबंधित जिम्मेदार कर्मियों और एजेंसियों पर कार्रवाई की जाएगी।
56 लाख से अधिक उपभोक्ताः
जेबीवीएनएल के पास वर्तमान में करीब 56 लाख उपभोक्ता हैं। जुलाई 2026 में निगम ने 56,04,917 उपभोक्ताओं में से 54,13,542 उपभोक्ताओं का बिल तैयार किया, जिससे राज्य की बिलिंग कवरेज 96.59 प्रतिशत तक पहुंच गई। यह अब तक का सर्वाधिक बिलिंग स्तर बताया गया है। निगम का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 100 प्रतिशत करना है। इससे पहले जून में बिलिंग दक्षता 95 प्रतिशत थी। उस महीने 55,97,117 उपभोक्ताओं में से 52,95,689 के बिल तैयार किए गए थे। निगम ने जुलाई में 99 से 100 प्रतिशत विलिंग का लक्ष्य तय किया था।
कैसे होगी कार्रवाई :
टीम सर्किल स्तर पर रैंडम उपभोक्ता चुनेगी। मौके पर मीटर रीडिंग लेकर बिल में दर्ज रीडिंग से मिलाएगी। यह भी जांचेगी कि पिछले महीनों में रीडिंग नियमित ली गई या नहीं।
वास्तविक और बिल की रीडिंग में अंतर मिलेने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी। इससे उपभोक्त्ताओं को सही बिल मिलेगा। बिजली चोरी और राजस्व में गड़बड़ी पर भी प्रभावी नियंत्रण होगा।
स्मार्ट मीटर से बढ़ी बिलिंग की विश्वसनीयता :
निगम स्मार्ट प्री-पेड मीटर और ऑनलाइन मीटर रीडिंग के जरिए बिलिंग व्यवस्था को मजबूत कर रहा है। जेबीवीएनएल के बिजनेस प्लान के अनुसार करीब सात लाख स्मार्ट मीटर पहले ही लगाए जा चुके थे और स्मार्ट मीटर वाले क्षेत्रों में बिलिंग मुख्य रूप से ऑनलाइन रीडिंग के आधार पर की जा रही थी। साथ ही मीटर रीडिंग में मानवीय गलती और गलत बिलिंग रोकने के लिए ओसीआर आधारित तकनीक भी लागू की जा रही है। वर्तमान में स्मार्ट मीटर की करीब 94 प्रतिशत रीडिंग सिस्टम में दर्ज हो रही है। अब निगम का जोर शेष उपभोक्ताओं को भी नियमित और वास्तविक मीटर रीडिंग के आधार पर बिल उपलब्ध कराने पर है।









